दुर्ग : बैंक सखी बनकर सम्मान और आर्थिक लाभ दोनों कमा रही हैं महिलाएं

-बिहान योजना के तहत प्रशिक्षण लेकर 41 महिलाएं बनी बैंक सखी

-कोविड संकट के दौरान पिछले एक महीने में मनरेगा के 4.43 करोड़ रुपए सहित पेंशन और जनधन खाताधारकों को 5 करोड़ रुपए का भुगतान

-आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ ग्रामीण अंचलों में नकद लेन देन की सशक्त कड़ी बनकर उभरीं बैंक सखियाँ

दुर्ग 9 जुलाई 2020

संकट के समय ही शक्ति की असली परीक्षा होती है। ये बात हमारी बैंक सखियों ने साबित कर दी है। कोविड संकट में जिस सक्रियता से इन्होंने काम किया है वह काबिले तारीफ है।मनरेगा के श्रमिकों को भुगतान करना हो ,बुजुर्गों और निःशक्तों को पेंशन का भुगतान करना हो या किसी भी ग्रामीण को अपने खाते से रुपए निकलना हो सारे काम बैंक सखियाँ कर रही हैं। जिसके कारण कोविड संकट के दौरान भी ग्रामीणों को रूपए पैसे की दिक्कत नहीं हुई। पाटन जनपद में 25,धमधा में 11 और दुर्ग  में 5 की महिलाएं कर रही हैं बैंक सखी के रूप में काम कर रही हैं।अब तक बैंक सखियों के माध्यम से 5 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है।

जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि बैंकों की सुविधा गांव में बैंक सखियों के रूप में उपलब्ध कराने की शासन की पहल बहुत उपयोगी साबित हुई है और लाकडाउन की अवधि में तो ग्रामीणों के लिए वरदान की तरह है। इन बैंक सखियों के माध्यम से ग्रामीण हर दिन लगभग पांच लाख रुपए का आहरण कर पा रहे हैं।बैंक सखी बनकर ये महिलाएं आर्थिक रूप से भी लाभान्वित हो रही हैं। हर लेनदेन के पीछे इनको बैंक के द्वारा कमीशन भी  मिलता है। इस तरह सेवा के साथ साथ आर्थिक लाभ भी उनको मिल रहा है। ये बैंक सखियाँ अपने गांव में रहकर सम्मान और रुपए दोनों कमा रहीं।

मनरेगा के श्रमिकों को बैंक सखियों के माध्यम से किया गया लगभग साढ़े 4 करोड़  रुपए का भुगतान- सीईओ जिला पंचायत ने बताया कि बैंक सखियों के माध्यम से जिले भर में मनरेगा श्रमिकों को 4 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। उन्होंने बताया कि कोरोना से हमारी लड़ाई की फ्रंट में ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड फाइटर के रूप में इन महिलाओं का भी योगदान है जिन्होंने बैंक सखी के रूप में ग्रामीणों को सेवाएं दीं। मनरेगा,जनधन खाते और पेंशन के भुगतान के लिए विकल्प प्रस्तुत किया। लाकडाउन के दौर में इससे दो फायदे हुए। ग्रामीणों को भी बैंक की शाखाओं की ओर रुख नहीं करना पड़ा और बैंकों में भी भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मदद मिली।

बैंक सखी बनकर केसरा की अंजू ने  किया जिले में सबसे ज्यादा 48 लाख रुपए का भुगतान- ग्राम पंचायत केसरा की अंजू सेन 12 वीं तक शिक्षित हैं। उनका सपना था कि आगे पढ़कर कोई काम करें लेकिन शादी फिर परिवार की जिम्मेदारी ने व्यस्त कर दिया।लेकिन अंजू ने अपनी लगन नहीं छोड़ी। गाँव में पहले एक छोटी दुकान शुरू की ,फिर स्व सहायता समूह से जुड़ीं। दुकान चलाकर हिसाब किताब में अंजू माहिर हो गई थीं।इसलिए जैसे ही पता लगा बिहान योजना के तहत बैंक सखी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है वो झट से तैयार हो गई। बैंक सखी का प्रशिक्षण लेने के बाद अंजू ने मुड़कर नहीं देखा। अंजू अब तक मनरेगा,पेंशन जनधन खाते  से ग्रामीणों को अब तक करीब  48 लाख रुपए का भुगतान कर चुकी हैं। जो कि जिले में सबसे ज्यादा है। जनधन योजना के 1 हजार 695 खाता धारकों को 10.59 लाख, बैक जमा लेन-देन  के तहत 9 लाख रुपए,मनरेगा के तहत श्रमिकों को भुगतान करीब 27 लाख पेंशन  के 93  हितग्राहियों को  65 हजार का भुगतान कर चुकी हैं। इसके अलावा ग्रामीणों के बिजली बिल और अन्य भुगतान  को मिलाकर करीब 60 हजार रुपए का ट्रांजेक्शन किया है।

खम्हरिया में बहु बनकर आई गायत्री यदु ने बैंक सखी बनकर परिवार और गाँव में कमाया सम्मान- पाटन जनपद के ग्राम खम्हरिया में बहु बनकर आई  गायत्री यदु  बैंक सखी बनकर काफी खुश हैं। गायत्री बताती हैं जब से बैंक सखी बनी हैं गाँव और परिवार में सम्मान बढ़ गया है। परिवार के लोग खुश हैं जब कोई कहता है हमारी बहु बैंक सखी बनकर लोगों को जरूरत के समय रुपए उपलब्ध कराती है। बहुत दुआ मिलती है। पिछले एक महीने में गायत्री ने करीब 30 लाख रुपए का भुगतान किया है। जिसमें जन धन योजना के 115 लोगों को करीब 3 लाख  रुपए, मनरेगा योजना में तहत मजदूरी भुगतान 5 लाख रुपए पेंशनधारियों को करीब 1.50 लाख रुपए एवं अन्य योजनाओं के तहत करीब ढाई 2.50 लाख रुपए का भुगतान किया गया है।

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