डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा : 8 जुलाई से 21 जुलाई तक

रायपुर : प्रदेश में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा गहन डायरिया नियंत्रण पखपाडा 8 जुलाई से 21 जुलाई तक मनाया जा रहा है। शून्य से 5 साल तक के बच्चों में मृत्यु का एक मुख्य कारण डायरिया से होने वाली मौतें भी हैं। इस लिए डायरिया से ग्रसित बच्चों का शीघ्र उपचार कर शिशु मृत्यु दर में कमी की जा सकती है।
डायरिया से होने वाली बीमारी के प्रभाव को रोकने, ओआरएस व जिंक की उपलब्धता बढ़ाने और डायरिया प्रबंधन को मजबूत बनाना ही पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य है। अस्पताल की ओपीडी में आए मोवा निवासी हरी राम साहू की 7 माह की बेटी धनेश्वरी को ओआरएस का घोल व जिंक टेबलेट का वितरण कर उन्हें समझाया गया कि घोल का 24 घंटे के भीतर उपयोग करना जरुरी है।
डायरिया रोग फैलने के मुख्य कारणों में बासी भोजन, दुषित जल का प्रयोग, शौच के दौरान साबुन से हाथ नहीं धोने से बीमारी का खतरा बना रहता है। जिले में 0-5 साल तक के बच्चों में 1.30 लाख लड़कों व 1.22 लाख लड़कियों सहित कुल 2.52 लाख बच्चों को ओआरएस व जिंक की घोल ओरल पिलाई जाएगी।
रायपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग की एचएमआईएस रिपोर्ट वार्षिक 2018-19 में से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रति 1000 जन्म लेने वाले बच्चे में मृत नवजात का जन्म दर 12.32 है। वहीं एसआरएस 2017 के आंकड़ों के अनुसार प्रति 1000 जीवित जन्म लेने वाले बच्चों में शिशु मृत्यु दर 38 है।
पखवाड़े के दौरान जिले के 210 स्वास्थ्य केंद्रों के ओपीडी व आईपीडी वार्ड में ओआरएस – जिंक कार्नर की स्थापना कर डायरिया से ग्रसित मरीजों का उपचार करना है। डायरिया नियंत्रण के लिए सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में ओआरएस – जिंक कार्नर की स्थापना भी की जायेगी| मरीजों को ओरल रिहाईडरेशन सोलूशन (ओआरएस ORS ) व जिंक निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा|
जिला नोडल अधिकारी डॉ. एस के सिन्हा ने बताया पखवाडा के दौरान जिले में 484 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता , 1870 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व शहरी 1050 व 1884 ग्रामीण मितानिनों द्वारा बच्चों से लेकर बड़ों को 7 स्टेप में हाथ धुलाई के तरीके भी बताएं जाएंगे जिससे संक्रमण को रोका जा सके। मुहल्लों में वाल पेंटिंग व स्लोगन लिखकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन द्वारा लोगों में जागरुकता लाने प्रयास करेंगे। गहन डायरिया पखवाड़ा के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा लोगों को उल्टी दस्त होने पर तत्काल नजदिक के स्वास्थ्य केंद्र व एएनएम से संपर्क करने की सलाह दी जाएगी। डॉ. सिन्हा ने बताया, शिशुवती माताओं को बच्चों के देखभाल में विशेष ध्यान देते हुए दस्त के दौरान एवं दस्त के बाद मां का दूध, तरल पदार्थ एवं ऊपरी आहार देना जारी रखना चाहिए। जन्म से लेकर 6 माह तक के बच्चों को सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए। इसके अलावा खाना बनाने एवं खिलाने के पहले और शौंच के बाद साबुन से हाथ जरुर धोंए ।
जिला चिकित्सालय पंडरी के ओपीडी हॉल में गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा के तहत ओआरएस – जिंक कार्नर की स्थापना 8 जुलाई को की गई। वहीं शिशु रोग विभाग के ओपीडी में आने वाले बच्चों को ओआरएस व जिंक का घोल पिलाया गया। सीएमएचओ डॉ.मीरा बघेल व जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ.आर. के. तिवारी के मार्गदर्शन में जिला चिकित्सालय के डॉ.व्ही.आर.भगत, डॉ.मोजरकर शिशु रोग विशेषज्ञ व जिला अस्पताल के सलाहकार के उस्पस्थिति में डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा का शुभारम्भ किया गया। इस मौके पर ओआरएस का पैकेट और जिंक की गोली का वितरण किया गया।
गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान कोरोना वायरस से बचाव के लिए भी साफ सफाई का ध्यान रखना है। इससे कई तरह के संक्रमण से बच्चों व स्वयं के स्वास्थ्य का खयाल रख सकते हैं। कोरोना संक्रमण के इस महामारी से बचाव के लिए सोशल डिसटेंसिंग और डिजिटल प्लेफार्म का उपयोग स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अपनाया जा रहा है| पखवाड़े के दौरान नॉन कंटेमेंनट जोन में स्थानीय परिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए घरों में तथा कुएं, जल स्रातों की साफ-सफाई एंव संक्रमण को रोकने हेतु क्लोरिन टेबलेट का वितरण किया जाएगा| जागरुकता अभियान के दौरान लोगों को यह बताया जा रहा कि 45 फीट और उससे उपर के लेयर वाले हैंडपम्प का पानी डायरिया को बढ़ावा देता है। बच्चों को गहरे लेयर के हैंडपम्प का पानी ही पिलाएं और यदि ऐसा संभव नहीं है तो पानी को गर्म कर अथवा क्लोरीन टैबलेट्स से पानी को शुद्ध कर ही पीयें। प्रदूषित पानी पीने, खान-पान में गड़बड़ी और आंतों में संक्रमण से डायरिया की बीमारी होती है। डायरिया होने पर मरीज को तब तक ओआरएस का घोल देना चाहिए जब तक दस्त ठीक न हो जाए। डायरिया ठीक होने के बाद बाद 14 दिन तक बच्चों को जिंक की दवा देनी चाहिए।
मितानिनों द्वारा सभी 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों के घरों में ओआरएस का व पैकेट का वितरण तथा इसके उपयोग की सलाह के संबंध में माताओं को जानकारी दी जायेगी| इस अभियान के दौरान मितानिनों को कोविड-19 सं संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ओआरएस व जिंक घोल बनाने की विधि का प्रदर्शन के दौरान फिजीकल डिस्टेंसिंग , मास्क लगाना व हैंड वासिंग के लिए सेनेटाइजर का इस्तेमाल करना जरुरी है। वहीं मितानिन द्वारा स्वच्छता की जानकारी देते हुए माताओं को शिशुओं में होने वाले खतरे की संभावना के बारे में बताते हुए जागरुक करेगी।

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