खजूर एक ऐसा फल है जो आपकी सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। इसमें इतने पोषक तत्व होते है कि इसको वंडर फ्रूट भी मान सकते हैं। कहते हैं कि इसमें आयरन, मिनरल, कैल्शियम, अमीनो एसिड, फॉस्फोरस और विटामिन्स से भरपूर खजूर आपकी कई शारीरिक कमजोरियां दूर होती है। ये इराक, इटली, चीन, अलजीरिया, अमेरिका और अरब में खजूर की भरपूर उपज होती है। कहते हैं कि खजूर में 5 प्रतिशत प्रोटीन, 3 प्रतिशत वसा तथा शर्करा 67 प्रतिशत होते हैं। साथ ही इसमें अल्प मात्रा में कैलशियम, लोहा तथा विटामिन ए, बी और सी भी पाए जाते हैं। पूरी तरह से पके हुए खजूर में शर्करा की मात्रा 85 प्रतिशत तक हो जाती है। प्रति 100 ग्राम खजूर के सेवन से 283 कैलोरी ऊर्जा मिलती है।
खजूर तीन प्रकार के होते हैं- खजूर, पिंड खजूर तथा गोस्तन खजूर (छुहारा) दरअसल खजूर सूखने पर छुहारा कहलाता है। खजूर एक प्रकार का सस्ता मेवा भी है, इस कारण उसे गरीबों का पाक भी कहते हैं। दमा, खांसी, बुखार तथा मूत्र संबंधी रोगों में भी खजूर का प्रयोग गुणकारी होता है। सर्दी-जुकाम होने पर खजूर को एक गिलास दूध में उबाल कर खा लें फिर ऊपर से वही दूध पीकर मुंह ढककर सो जाएं। – खजूर की गुठली को पानी में घिसकर लेप बनाकर माथे पर लगाने से सिरदर्द दूर होता है। दमे के कष्ट से राहत पाने के लिए खजूर के चूर्ण को सोंठ के चूर्ण के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर पान में रखकर दिन में लगभग तीन बार खाएं। – जिन्हें बार−बार पेशाब आने की शिकायत हो उन्हें दिन में 2 बार दो−दो छुहारे तथा सोते समय दो छुहारे दूध के साथ खाने चाहिए।
बच्चों में सूखा रोग होने पर खजूर और शहद की बराबर मात्रा दिन में दो बार नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक खिलाएं। – छोटे−मोटे घाव होने पर खजूर की जली गुठली का चूर्ण लगाएं। – नींबू के रस में खजूर की चटनी बनाकर खाने से भोजन के प्रति अरूचि मिटती है।
शहद के साथ खजूर के चूर्ण का तीन बार सेवन रक्त पित्त की अवस्था में लाभदायक होता है। – बवासीर होने की अवस्था में खजूर गर्म पानी के साथ सोते समय लें। कब्ज के लिए भी यही प्रयोग अपनाएं।