185 नकली राशनकार्ड बनाकर निकाला राशन, हैकिंग के लिए 9 IP एड्रेस का उपयोग किया गया…पढ़िए पूरी खबर

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में फर्जी राशन कार्ड बनाकर अनाज की हेराफेरी करने का मामला सामने आया है। इससे खाद्य विभाग को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। यह खुलासा खाद्य विभाग द्वारा पुलिस में रिपोर्ट लिखवाने के बाद हुआ। जिले के दुर्ग, धमधा और पाटन जनपद पंचायत समेत भिलाई 3 और भिलाई नगर निगम क्षेत्र में 185 नकली राशन कार्ड बनाए गए हैं। इनमें से 57 राशन कार्ड का उपयोग कर राशन भी निकाला गया है। मामले की शिकायत खाद्य निरीक्षक दीपा वर्मा ने दुर्ग सिटी कोतवाली में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने कहा कि राशन कार्ड बनाने का अधिकार सिर्फ खाद्य विभाग को है। खाद्य विभाग के सिस्टम से ही राशन कार्ड बनाया जाते हैं। लेकिन अवकाश के दिन और शाम को छुट्टी के बाद विभाग के सर्वर को हैक करके अज्ञात लोगों का फर्जी तरीके से राशन कार्ड बनाए हैं।

विभाग के सदस्य की मिलीभगत
फर्जी तरीके से राशन कार्ड बनाने के लिए 9 आईपी एड्रेस का उपयोग किया गया है। इसकी पुलिस जांच कर रही है। मामले की जांच के लिए पुलिस ने साइबर सेल को जानकारी भेजी है। पुलिस को संदेह है कि आईपी एड्रेस की जानकारी NIC और खाद्य विभाग के सदस्यों को ही होती है। इसके अलावा किसी और को जानकारी नहीं होती। पुलिस को संदेह है कि दोनों विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से ही फर्जी राशन कार्ड बनाने का काम किया गया है।

पता चला है कि भिलाई निगम के जोन 5 में मलखान सिंह सोरी थे, जिन्हे एक आईपी एड्रेस दिया गया था। जब मलखान का तबादला जोन 3 में हुआ तो उसका आईपी एड्रेस ब्लॉक कर दिया गया था। इस ब्लॉक आईपी एड्रेस का उपयोग भी राशन कार्ड बनाने में किया गया है।

ब्लाक आईडी भी का इस्तेमाल
जानकारी के मुताबिक, कुल 185 राशन कार्ड बनाए गए। विभागीय आईपी एड्रेस से विभिन्न फर्जी आईपी एड्रेस वाले कम्प्यूटर व मोबाइल से तैयार कर फर्जी राशन कार्ड से राशन दुकान से अनाज की अफरा-तफरी की गई है। इससे हर महीने करीब दो लाख रुपए से ज्यादा का शासन को नुकसान हुआ है। कुल 57 राशनकार्डों में फर्जी तरीके से राशन का आहरण भी किया गया।

खाद्य नियंत्रक सीपी दीपांकर ने बताया कि राशन कार्ड बनाने में उस ब्लाक आईडी का इस्तेमाल किया गया है। मुझे आशंका है कि फर्जीवाड़े में एनआईसी के लोगों की भी संलिप्तता होगी। इस फर्जीवाड़े की खबर लगते ही खाद्य निरीक्षक दीपा वर्मा ने पुलिस से शिकायत की है। साथ ही आईपी एड्रेस की सूची भी सौंपी गई है।

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