स्वावलंबी और उद्यमशील बनेंगे प्रदेश के ‘आकांक्षी युवा’: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बेरोजगारी केवल सरकारी नौकरियों से दूर नहीं होगी। 145 करोड़ जनसंख्या वाले भारत देश में सरकारी नौकरियों का अनुपात 1 प्रतिशत से अधिक नहीं है। देश के सबसे बड़े नियोजक सशस्त्र बल में भी थल, जल और वायु सेना में सम्मिलित रूप से केवल 13.5 लाख व्यक्ति ही नियोजित हैं। प्रदेश के आकांक्षी युवाओं को स्वावलंबन और उद्यमशीलता के माध्यम से रोजगार से जोड़ने के प्रयास किया जा रहे हैं। प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को अब ‘आकांक्षी युवा’ कहा जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश को 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके आधार पर 21 लाख युवाओं को रोजगार प्राप्त हो सकेगा। कृषि, पशुपालन तथा हुनर आधारित उद्यमों में भी प्रदेश के युवाओं को नियोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को दिल्ली में एक निजी समाचार चैनल के फायरसाइड चैट सत्र – ‘हाउ स्टेटस ऐड टू इंडिया स्टोरी’ को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश देश में सबसे तेज गति से विकास करने वाला राज्य है, जिसका उन्हें गर्व है। वर्तमान में प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 15 लाख करोड़ रुपए है और वार्षिक विकास दर 12% है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002-03 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 11 हजार रुपए थी, जो अब बढ़कर 1 लाख 52 हजार रुपए हो गई है। वर्ष 2002-03 में प्रदेश का सिंचित रकबा 7 लाख हेक्टेयर था जो अब बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर हो चुका है, प्रदेश सरकार इसे बढ़ाकर एक करोड़ हेक्टेयर तक ले जाने के लिए प्रयासरत है। प्रदेश का वर्तमान बजट 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए है, जिसका केवल 10% ही मार्केट से पूंजीगत निवेश के लिए उधार लिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ मंत्र पर काम करती है। प्रदेश में बुलडोजर के माध्यम से न्याय करने का कोई प्रावधान नहीं है। परंतु अवैध निर्माण पर स्थानीय निकायों द्वारा नियमानुसार काईवाई अवश्य की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रदेश में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, लेकिन ऐसी किसी स्थिति में तत्परता के साथ उसका निराकरण कर उदाहरण स्थापित किया जाता है। प्रदेश में खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत खुले में मांस अथवा अन्य खाद्य सामग्री का विक्रय नियमानुसार किया जा रहा है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने पर उत्तराखंड और अन्य राज्यों के प्रयोग देखकर निर्णय लिया जाएगा।

 

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