राज्य स्थापना दिवस हमारी मूल पहचान और सम्मान को बढ़ाने का संकल्प दिवस : राज्यपाल पटेल

भोपाल
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि राज्यों का स्थापना दिवस पर हमारे देश की मूल पहचान और सम्मान को बढ़ाने का संकल्प दिवस है। इसे अपनी विरासत को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाने के संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे सभी राज्यों ने हमेशा अपनी धरोहर, संस्कृति और परंपराओं के सम्मान के द्वारा राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाया है। इस गौरवपूर्ण धरोहर को सहेजने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का कार्य करना हम सभी का परम दायित्व है। उन्होंने कहा कि राज्यों के स्थापना दिवस देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के उत्सव है। भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता की धरोहरों के संरक्षण, संकल्प "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" का शानदार प्रदर्शन है। राज्य का स्थापना दिवस को मनाना प्रगति और विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने का प्रसंग है।

राज्यपाल श्री पटेल राजभवन के सांदीपनि सभागार में आयोजित बिहार, राजस्थान और ओडिशा के स्थापना दिवसों के संयुक्त समारोह में राज्यों के मूल निवासी मध्यप्रदेश में निवासरत नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री के. सी. गुप्ता, पोस्ट मास्टर जनरल इंदौर परिक्षेंत्र सुश्री प्रीति अग्रवाल, निदेशक डाक सेवाएं श्री भरत कुमार डालमिया और राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव मंचासीन थे।

राज्यपाल ने सिकल सेल पर डाक विभाग के विशेष आवरण का किया अनावरण
इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने सिकल सेल एनीमिया रोग जन जागृति पर डाक विभाग द्वारा जारी विशेष आवरण एवं विरूपण मोहर का अनावरण किया। पोस्ट मास्टर जनरल इंदौर परिक्षेंत्र सुश्री प्रीति अग्रवाल ने बताया कि डाक टिकट देश विदेश में जन जागृति के प्रभावी माध्यम होते हैं। डाक विभाग द्वारा जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर सिकल सेल एनीमिया रोग पर डाक टिकट जारी किया गया था। इसी क्रम में जारी विशेष आवरण के अनावरण के लिए राज्यपाल के प्रति आभार ज्ञापित किया। राज्यपाल श्री पटेल को देवी अहिल्या पर डाक विभाग द्वारा जारी टिकट की पेंटिंग भेंट की। राज्यपाल ने विशेष आवरण के रूपांकन में सहयोगी एम्स भोपाल के चिकित्सक डॉ. रजनीश जोशी और डॉ. अनन्य सम्पत का सम्मान किया गया।

बिहार भारतीय सभ्यता और संस्कृति का उत्पत्ति स्थल
 राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने बिहार, ओडिशा और राजस्थान राज्यों की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बिहार राज्य हमारी अनेकता में एकता के गुलदस्ते का वह मोती है, जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति के उत्पत्ति स्थल के रूप में जाना जाता है। यहाँ की भूमि ने हमेशा ज्ञान, शिक्षा और धर्म के क्षेंत्र में योगदान दिया है। पाटलिपुत्र, वर्तमान पटना ही वह स्थान है, जहाँ से भारत के सम्राटों और महान विचारकों ने इतिहास रचा था। बिहार के लोगों ने चाहें वह कृषि क्षेंत्र हो, उद्योग हो या फिर सेवा क्षेंत्र, हर जगह अपनी कड़ी मेहनत से पहचान बनाई है।

राजस्थान ने मानवता के उत्थान में दिया योगदान
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि वीरों की भूमि राजस्थान ने हमेशा मानवता के उत्थान में योगदान दिया है। हमेशा देश और दुनिया को अपनी कला, साहित्य, इतिहास और भव्यता से मंत्रमुग्ध किया है। राजस्थान राज्य का गठन केवल प्रशासनिक घटना नहीं, राज्य की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने का प्रसंग था। राजस्थान की विविधता और उसकी संपूर्णता की पहचान उसकी संस्कृति, रीति-रिवाज, लोककला, संगीत, नृत्य और वस्त्रों में बसी हुई है। यहाँ की लोक कला, संगीत और नृत्य ने विश्वभर में राजस्थान का नाम रोशन किया है। यहां का थार रेगिस्तान, अरावली की पहाड़ियाँ, ऐतिहासिक किले और मंदिर राज्य की अद्वितीय प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं। राज्यपाल ने समारोह में विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के कलाकारों को उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए बधाई दी।

ओडिशा देश का सांस्कृतिक केंद्र
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि देवस्थली ओडिशा की भूमि ने हमेशा देश और दुनिया को अपनी अद्वितीय सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहर और उत्कृष्ट कला से प्रभावित किया है। यह देश का सांस्कृतिक केंद्र है, जिसकी भूमि पर प्राचीन सभ्यताएँ फली-फूलीं है।  विश्व में उड़ीसा के मंदिरों, किलों और ऐतिहासिक स्थलों से देश की पहचान बनी है। विशेषकर कटक, भुवनेश्वर, पुरी और जगन्नाथ मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल उड़ीसा की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को प्रमुखता से प्रस्तुत करते हैं।

राज्यों के राज्यपालों के संदेश का हुआ प्रसारण
कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान, ओडिशा के राज्यपाल श्री हरि बाबू कंभमपति का वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया और राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे के संदेश का वाचन किया गया।

राज्यों के सांस्कृतिक वैभव का हुआ प्रदर्शन
समारोह में बिहार, राजस्थान और ओडिशा के राज्यों की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गई। बिहार सांस्कृतिक परिषद भोपाल के कलाकार सुश्री नीतू सक्सेना एवं साथियों ने बिहारी के लोक नृत्य ‘अब हम चलते हैं बिहार की ओर और देखते हैं बिहार सांस्कृतिक परिषद भोपाल के द्वारा तैयार बिहारी लोक नृत्य झिझिया, चैती, चैतावर गीत, कज़री, छठपूजा की झलक और बिहारगान की संयुक्त प्रस्तुति दी। राजस्थान सांस्कृतिक परिषद के कलाकारों सुश्री ऋचा सैनी, रूचि एवं साथियों ने कालबेलिया, सुश्री नेहा एवं साथियों ने 13 ताली नृत्य की प्रस्तुति दी। 

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