रांची. झारखंड की राजधानी रांची के कांके प्रखंड के ऊपरी कोनकी के पहाड़ों की खूबसरती में कई रोमांचकारी रहस्य भी छिपे हैं. टीम करीब 4 किमी का सफर तय कर जब ऊंचाई पर पहुंची तो ग्रामीणों ने एक ऐसी गुफा के बारे में बताया जहां तक पहुंचना कतई आसान नहीं. पुसू पहाड़ की ऊंचाई पर जंगलों के बीच मौजूद इस गुफा तक पहुंचकर उसके रहस्यों को जानना किसी एडवेंचर से कम नहीं है.
रांची के आसपास पहाड़ों में मौजूद कुदरत के खजाने में ऐसा बहुत कुछ है जो हमें चौंकाने की ताकत रखता है. रांची के पिठौरिया में पहाड़ों की एक पूरी श्रृंखला है. इन्हीं पहाड़ों पर मौजूद जंगलों में ऐसा बहुत कुछ है, जिसकी जानकारी यहां सालों से रहने वाले ग्रामीणों को ही है. बाहरी दुनिया के लोग इससे अंजान हैं. दरअसल, पुसू पहाड़ पर घने जंगलों और चट्टानों के बीच एक ऐसी गुफा है, जो आसानी से दिखाई भी नहीं देती है. करीब 70 फीट लंबी इस गुफा में मौजूद शिवलिंग को देखने के लिए जब कुछ ग्रामीणों के साथ टीम ने पहाड़ की चढ़ाई शुरू की तो कई बार ग्रामीण ही गुफा का रास्ता भटक गये. आखिरकार गुफा का रास्ता मिल ही
गुफा के अंदर एक शिवलिंग है, जिसके चारों ओर पानी ही पानी है
गुफा के अंदर का नजारा बेहद मनोरम और रोमांच से भरा है. बेहद संकरी इस गुफा के अंदर झरने का पानी सालोभर बहता रहता है. चट्टानों से लगातार पानी गिरने से अंदर काफी फिसलन है. चट्टानें भी बेहद नुकीली हैं, लिहाजा बहुत संभल कर अंदर प्रवेश करना पड़ता है. मकर सक्रांति को छोड़कर इस गुफा में कोई आता-जाता नहीं है.
सुखराम मुंडा का दावा है कि इस गुफा के बारे में न तो सरकार को जानकारी है और न ही प्रशासन को. अगर इसे पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाए तो पूरे क्षेत्र का विकास हो सकता है. पहाड़ों पर ही रहने वाले चमरू मुंडा बताते हैं कि इस गुफा में सिर्फ मकर सक्रांति के समय ही स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ उमड़ती है. उस दिन पहाड़ पर पुसु मेला लगता है.
गुफा के अंदर हमेशा पहाड़ों से पानी गिरता रहता है. इस अंधेरी गुफा के अंदर एक बार में एक ही व्यक्ति प्रवेश कर सकता है. गुफा के अंदर करीब 7 फीट की एक शिवलिंग है, जिसके चारों तरफ झरने का पानी भरा रहता है. बेहद संकरी इस गुफा के भीतर सिर्फ झरनों का शोर सुना जा सकता है. रोशनी अच्छी होने पर शिवलिंग को देखा भी जा सकता है. हालांकि, मकर संक्रांति के दिन इस गुफा के पास एक मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल होते हैं.