कर्तव्यों में विफलता से पैदा होती है महिलाओं के खिलाफ हिंसा: राष्ट्रपति

देश में महिलाओं के खिलाफ हाल की घटनाओं पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गहरी चिंता जताई है। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या समाज बराबरी के अधिकारों के दृष्टिकोण पर खरा उतरता है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि पूरी दुनिया के लिए मानवाधिकार दिवस को मनाने का आदर्श तरीका यह होगा कि हम यह आत्म अवलोकन करें कि मानवाधिकार की वैश्विक घोषणा के संदेश पर खरा उतरने के लिए क्या किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि गांधी ने कहा था कि मानवाधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। मानवाधिकार और महिलाओं के खिलाफ हिंसा में हमारी विफलता अक्सर हमारे कर्तव्यों में विफलता से उत्पन्न होती है।

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