रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते मानव अधिकार हनन के मामले में पीड़ितों को न्याय की आस है। वे इंतजार कर रहे हैं। वहीं मानव अधिकार हनन के लंबित प्रकरणों को छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग जल्द निपटाने में नाकाम रहा है। नतीजा ये हो रहा है कि लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसे कम करने को लेकर एक ओर सरकार अपने तरफ से प्रयास कर रही है। प्रशासन स्तर पर भी कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन वर्तमान हालांकि स्थिति को कुछ और ही बयां कर रहे। आयोग के आंकड़ों की बात करें तो एक अप्रैल 2015 की स्थिति में 686 प्रकरण लंबित थे। इसमें 31 मार्च 2016 की स्थिति में प्राप्त प्रकरण 1825 प्राप्त हुए। कुल 2511 प्रकरणों में 1958 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जबकि 553 प्रकरण लंबित रहे। वहीं 31 मार्च 2017 में 1593 प्रकरण प्राप्त हुए।
पहले के प्रकरण मिलाकर 2147 में से 1532 का निराकरण हुअ, जबकि 615 प्रकरण फिर लंबित रह गए। इसी तरह एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 तक 1489 मामले आए, पहले के प्रकरणों को मिलाकर संख्या 2104 हो गई। इसमें से 1409 मामले निराकृत, जबकि 696 लोग न्याय के लिए इंतजार करते रहे।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो एक जनवरी 2019 से नौ दिसंबर 2019 तक की स्थिति में 1182 प्रकरण थे। इसमें से 846 का निराकरण हुआ है, जबकि नौ दिसंबर तक की स्थिति में आयोग में कुल 631 प्रकरणों का निराकरण होना बाकी है, जिसके लिए पीड़ित लंबे समय से इंतजार कर तो रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।
मानव अधिकार हनन में राजधानी आगे
आयोग के अनुसार मानव अधिकार हनन के 27 जिलों में सबसे अधिक मामले रायपुर से हैं, जिसमें 31 मार्च 2019 की स्थिति में 440 प्रकरणों में 285 का निरकारण हुआ। दूसरे नंबर पर दुर्ग है, इसमें 205 प्रकरणों में 162 का निराकरण हुआ। वहीं तीसरे नंबर पर बिलासपुर जहां 169 लंबित प्रकरणों में 138 निराकृत हुए। चौथे में कोरबा 144 में 102 प्रकरणों को निपटाया गया। जबकि राजनांदगांव इसमें मानव अधिकारों के हनन के मामले में पांचवे नंबर पर रहा। इसमें 114 में 85 मामलों को निपटाया गय
इस तरह के मामले शामिल
आयोग में लंबित प्रकरणों में पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु, जेल में मृत्यु, बलात्कार पीड़ित, अवैध गिरफ्तारी, दहेज प्रताड़ना, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, प्रदूषण से संबंधित प्रकरण, महिला अत्याचार, टोनही प्रताड़ना, बाल विवाह, आदिवासी अत्यचार, झूठे प्रकरण में फंसना जैसे कई मामले में पहुंचते हैं।
कई पद खाली
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग में स्थाई अध्यक्ष, सचिव, पुलिस अधीक्षक सहित कई अन्य पदें खाली है। जिनकी भर्ती के लिए आयोग ने लंबे समय से प्रशासन को पत्र भी लिखकर अवगत कराता रहा है। बावजूद यहां सालों से खाली पदों पर भर्ती नहीं हो पाई है। जो यहां के कार्य को प्रभावित कर रहे हैं।
– आयोग में पहुंचने वाले मानव अधिकार हनन के मामलों को जल्द से जल्द निपटाया जा रहा है। वर्तमान स्थिति में लंबित प्रकरणों की संख्या पहले की अपेक्षा काफी कम है, जिसे भी जल्द निपटा लिया जाएगा। – एमपी सिंघल, कार्यवाहक, अध्यक्ष छत्तीसगढ़, मानवाधिकार आयोग
