बस्तर में खुलेगा विश्व का पहला वैश्विक प्रकृति पर्यावरण विश्वविद्यालय

कोंडागांव। वर्ल्ड कॉन्स्टिट्यूशन एंड पार्लियामेंट एसोसिएशन और ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय के परिसर और भ्रम सभागार में वार्षिक महाअधिवेशन में विश्व भर के पर्यावरण विशेषज्ञों ने शिरकत की। महाअधिवेशन का विषय क्लाइमेट चेंज एंड द इमर्जिंग वर्ल्ड पार्लियामेंट था। इसमें विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ राजाराम त्रिपाठी थे। अध्यक्षता विश्व प्रसिद्ध पर्यावरण संविधान विशेषज्ञ (वाक्फा) के चेयरमैन डॉ. ग्लेन मार्टिन ने की।

ओपी जिंदल विश्वविद्यालय की कुलपति सीवाईएसआर मूर्ति, स्वामी अग्निवेश, केबिनेट मंत्री कालूराम गुर्जर, अमित पाल, संयोजक राकेश छोकर, वरिष्ठ लेखिका कुसुमलता सिंह आदि विशिष्ट अतिथियों के रूप में मौजूद थे। इन्होंने अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि की आसंदी से डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि आज न चाहते हुए भी किसान जहरीले बीज, जहरीली खाद, जहरीली दवाओं की जहरीली खेती करने को मजबूर हैं। अनाज,फल, सब्जियां, दूध, मांस मछली सब कुछ, यहां तक कि हवा भी विषाक्त हो चली है।

डॉक्टर त्रिपाठी ने कहा कि आज समय की पुकार है कि हम पर्यावरण रक्षा तथा प्रकृति के साथ बिना उसे नष्ट किए जीने के सलीके सीखें। इस विषय पर सतत शोध तथा इस ज्ञान को किस ग्रह पर रहने वाले हर मनुष्य तक पहुंचाना बेहद जरूरी है, इस विषय के व्यापक महत्व को देखते हुए, इस विषय पर केंद्रित एक पृथक विश्वविद्यालय स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वाक्फा चाहे तो इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए आवश्यक जमीन बस्तर जिले में वे प्रदान करेंगे। इसका पार्लियामेंट के सभी सदस्यों ने तालियों से स्वागत किया और ध्वनिमत से स्वीकृति भी प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में सभी विशिष्टजनों को विभिन्न् अवार्ड प्रदान किया गया।

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