रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि हमारी सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए दृढ़ संकल्पित है। दावा किया कि पहली बार यह हुआ कि सरकारी कार्यक्रमों से लोग इतना प्रभावित हुए कि अब नक्सलियों को नई भर्ती में परेशानी हो रही है। एक साल में हम लोगों ने जो काम किए उसमें नक्सल घटनाओं में 50 फीसद की कमी आई है। बड़े नक्सली या तो गिरफ्तार हुए या सरेंडर करने पर मजबूर हुए। अन्यथा मार गिराए गए। नौ बड़े हथियारबंद नक्सली मारे गए। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुए थे। यह हमारी रणनीतिक सफलता है।
सरकार की पहली वर्षगांठ के मौके पर मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के पास नक्सलवाद से निपटने की कोई योजना नहीं थी। यहां तक की विधानसभा में हुई क्लोजडोर मिटिंग में भी इस सरकार ने कोई काम नहीं किया। बस गोली का जवाब गोली से देती रही। इस दौरान जितने कैंप खोले गए उतना नक्सलवाद बढ़ता गया। उन्होंने कभी पीड़ित-प्रभावितों से बात ही नहीं की। हमने बात करना शुरू किया है। पता चला कि विश्वास, विकास और सुरक्षा से नक्सलवाद का खत्मा किया जा सकता है।
सवाल : नक्सल समस्या का समाधान कैसे होगा?
जवाब : सबसे पहले वहां के लोगों का विश्वास जीतना होगा। फिर विकास करना होगा, लेकिन भौतिक विकास, सड़कों का, बिल्डिंग का नहीं, व्यक्ति का विकास हो। जो सुपोषित, शिक्षित, स्वास्थ्य हो, उनके रोजगार की व्यवस्था हो। नक्सली किसी बड़े बुजुर्ग बीमार को भर्ती नहीं करते युवाओं को भर्ती करते हैं। युवा तो लिमिटेड हैं। उन युवाओं को आप हल पकड़ाना चाहते हैं या बंदूक। हल नहीं पकड़ाए, रोजगार नहीं दिए तो फिर वह बंदूक की तरफ आकर्षित होगा।
सवाल : बस्तर में रोजगार सृजन कैसे किए जाएंगे?
जवाब : हमने वहां कर्मचारी चयन बोर्ड का गठन किया है, ताकि वहीं के स्थानीय लोगों को रोजगार मिलें। हमने कहा एनएमडीसी की परीक्षा यहीं होनी चाहिए। हमने कहा है कि सड़क भी छोटे-छोटे टुकड़ों में बनाएं। वहीं के युवाओं को आप ठेकेदार बनाइए। ताकि लोगों को काम मिले।
सवाल : सरकार के लिए बड़ी चुनौती आप किसे मानते हैं?
जवाब : नक्सल समस्या तो है ही कुपोषण भी बड़ी समस्या है। महिलाओं में खून की कमी को मैं बड़ी चुनौती मानता हूं, क्योंकि यह पीढ़ी को कमजोर करता है। राज्य के 39.9 फीसद लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, यह भी बड़ी चुनौती है।
सवाल : बेरोजगारी की समस्या का कैसे सामना करेंगे?
जवाब : छत्तीसगढ़ किसानों का प्रदेश है। केवल सरकारी नौकरी ही नहीं बल्कि हमें कृषि पर ध्यान देना होगा। हमारी कोशिश है कि पांच एकड़ तक की खेती वाले किसानों की आय कम से कम तृतीय चतुर्थ कर्मचारी के बराबर हो। जब हम यह कर लेंगे तब हम बेरोजगारी की समस्या का भी पार पा लेंगे।
सवाल : पूर्ववर्ती सरकार राज्य में सिंचाई क्षमता बढ़ाने का दावा करती रही है?
जवाब : जब जोगीजी मुख्यमंत्री थे उन तीन सालों में दो लाख 30 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था की। जब हम एमपी में थे तब यहां सिंचाई का क्षेत्र 13 लाख 20 हजार हेक्टेयर था। कुल मिलाकर 15 लाख 50 हजार हेक्टेयर हो गया। वो इसे बढ़ाकर 20 लाख हेक्टेयर करने का दावा कर रहे है। तो 15 साल में केवल पांच लाख हेक्टेयर बढ़ाया। लेकिन वास्तव में यह केवल साढ़े 11 लाख है। इसका मतलब संरक्षण में आपने सैकड़ों करोड़ फूंक दिया, केवल कागजों में हुआ। हकीकत में कुछ नहीं हुआ। यदि किसानों को मजबूत करना है तो सिंचाई के लिए काम करना होगा वास्तविक काम जो कागज पर नहीं धरातल पर दिखने वाले होने चाहिए।
सवाल : आपने पूर्ववर्ती सरकार की मोबाइल वितरण योजना रोक दी?
जवाब : यदि हितग्राही को सीधे पैसा दिया जा सकता है तो क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। आप उनको अपने पसंद से खरीदने दीजिए। मोबाइल खरीद का क्या हश्र हुआ। आज भी छह सौ करोड़ देना बाकी है। यदि सारे लेते तो सैकड़ों करोड़ बाकी रहता। हमने धान और तेंदूपत्ता का पैसा भी खाते में पहुंचाया। हम उससे चप्पल- जूता नहीं खरीद रहे हैं। यदि चप्पल- जूता खरीदते तो वहां कमीशनखोरी शुरू हो जाता। यही काम पिछले समय में हुआ था।
सवाल : गोठान को लेकर आगे की क्या योजना है?
जवाब : हर गांव में हम गोठान बनाना चाह रहे हैं। अभी दो हजार बनाया है, आने वाले साल में तीन हजार का टारगेट कर रहे हैं। 20 हजार गांव हैं एक दिन में नहीं बन जाएगा इसके लिए पैसा चाहिए, बहुत सारे मजदूर चाहिए, प्रशिक्षण चाहिए। वहां के उत्पाद को बचेने की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी।
