अंबिकापुर । कड़ाके की सर्द रात, तापमान का पारा लुढ़कते हुए 6 डिग्री सेंटीग्रेट तक पहुंच चुका है। सिर में प्लास्टिक और एक पतला सा कंबल ओढ़े यह शख्य ठिठुरता हुआ देर रात शहर के गांधी चौक के समीप एक ठेले पर सोया नजर आया तो उसकी बेबसी भी खुलकर सामने आ गई। भीख मांग कर शहर में गुजर-बसर करने वाला यह शख्स हर रात यहां ऐसे ही सोता दिखाई देता है। इसके जैसे दर्जनों लोग अंबिकापुर शहर के बस स्टैंड, कंपनी बाजार और प्रमुख व्यवसायिक मार्गों के किनारे सर्द रात में ठिठुरते हुए पड़े रहते हैं। ऐसे लोग प्रशासन के उस दावे की पोल खोल रहे हैं जिसमें जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाने के लिए सारे उपाए किए जाने की दलील दी जाती है।तेजी से विकसित हो रहे अंबिकापुर शहर में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आकर निवास कर रहे हैं। इनके पास कोई स्थाई रोजगार नहीं है। कभी भीख मांग कर तो कभी मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले ऐसे बेसहारा और आवास हीन लोगों के समक्ष सर्द रात गुजारना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
दिन तो किसी तरह गुजर जाता है लेकिन रात गुजारना इनके लिए कष्टकर होता है। ऐसे लोग कंपनी बाजार, बस स्टैंड, गुदरी बाजार सहित दूसरे शासकीय भवनों के बरामदे और शेड के नीचे रात गुजारते नजर आते हैं। कभी किसी की नजर पड़ी तो फटा पुराना एकाद कंबल दे दिया जाता है।
ऐसे लोगों के पास शहर में कोई स्थाई ठिकाना नहीं होता ।ऐसे ही लोगों के लिए प्रशासन की ओर से अलाव के साथ गर्म कपड़े और रेन बसेरा आदि की व्यवस्था किए जाने का दावा किया जाता है। नगरीय क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद के अधिकारियों को यह जवाबदारी महज कागजों में दे दी जाती है।
इस साल भी कलेक्टर सरगुजा ने कागजी तौर पर आदेश तो जारी कर दिया है, लेकिन धरातल पर ऐसे जरूरतमंद ठिठुरते लोगों को राहत देने के लिए कोई पहल नहीं की गई है। संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में रात 10 बजे के बाद बंद दुकानों के सामने कंपनी बाजार और बस स्टैंड के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर जरूरतमंद बेसहारा लोगों को ठिठुरते हुए देखा जा सकता है।
कहने को तो शहर में कई सेवाभावी संस्थाएं हैं लेकिन ऐसे जरूरतमंद लोगों के लिए यह संस्थाएं कभी सामने नहीं आती। साधन संपन्न् परिवार से जुड़े संस्थाओं के लोग सिर्फ वही दिखावा करते हैं जिसमें शासन-प्रशासन तक उनकी संस्था का नाम पहुंच जाए और उनका व्यक्तिगत स्वार्थ पूरा होता रहे।
वास्तव में एक भी संस्थाएं जरूरतमंदों की मदद के लिए अभी तक सामने नहीं आ सकी है। अब समय आ गया है कि दिखावे का सेवा भाव छोड़कर कड़ाके की सर्दी में रात गुजारने वालों के लिए भी मदद के हाथ बढ़े ताकि ठंड से किसी की मौत का कलंक सरगुजा जिले को न लग सके।
नगर निगम प्रशासन की ओर से हर वर्ष ठंड के सीजन में अलाव की व्यवस्था की जाती है। बस स्टैंड के अलावा सार्वजनिक जगह जहां लोगों का आना जाना लगा रहता है। बस स्टॉपेज जहां से लोग बसों में चढ़ना उतरना करते हैं ऐसे स्थानों पर भी अभी तक अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है।
एक भी अलाव नगर निगम प्रशासन आरंभ नहीं कराया है। सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था हो जाने से भी लोगों को थोड़ी राहत मिलती है। शहर में दर्जनों रिक्शा और ऑटो चालक ऐसे हैं जो रात्रि कालीन सेवा उपलब्ध कराते हैं।
वह भी कड़ाके की ठंड में ठिठुरते रहते हैं ऐसे लोगों को अलाव की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। उम्मीद है कि नई दुनिया की इस खबर के बाद नगर निगम प्रशासन जागे और आज से ही दो चार स्थानों पर अलाव की व्यवस्था कर दे तो लोगों को थोड़ी राहत मिलेगी।
प्रशासन की नजर में वाहवाही बटोरने के कार्य में लगी कथित सेवाभावी संस्थाओं से भी जरूरतमंद लोगों को उम्मीद रहती है कि ठंड से बचाव के लिए उन्हें गर्म कपड़े मिल जाएंगे, लेकिन अभी तक एक भी सेवाभावी संस्था इन जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे नहीं आई है।
कुछ वर्ष पूर्व सरगुजा जिले के एक आला पुलिस अधिकारी ने रात्रि कालीन अगस्त में निकलने वाले पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों को बड़ी संख्या में कंबल उपलब्ध कराया था।
रात्रि गश्त में निकलने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को जहां भी सर्द रात में ठिठुरते लोग नजर आते थे, उन्हें वह नया कंबल प्रदान कर खुले आसमान के नीचे रहने के बजाय सेड अथवा छत वाली जगह पर शिफ्ट कर दिया करते थे, ताकि ठंड से किसी की जान ना जाए। आज के दौर में प्रशासनिक स्तर पर भी ऐसी कोई पहल नहीं हो रही है। रात के अंधेरे में जरूरतमंद बेसहारा लोगों को देखने वाला इस शहर में कोई भी नजर नहीं आता है।
यह है प्रशासनिक दावा
कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर ने राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में शीतलहर एवं पाला की स्थिति में नगरीय निकाय व ग्रामीण क्षेत्रों में बसे नि:सहाय, आवासहीन, गरीब, वृद्ध और स्कूल जाने वाले विद्यार्थी से प्रभावित होने वाले जन सामान्य के बचाव हेतु समुचित प्रबंध करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।
रिक्क्षा चालकों, दैनिक मजदूरों, आवास विहीनों व सदृश्य श्रेणी के नि:सहाय व्यक्तियों हेतु रैन बसेरा अस्थायी शरण स्थलों में ठहरने की समुचित व्यवस्था और पर्याप्त संख्या में कम्बल रखने, अलाव की व्यवस्था, आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं, स्कूलों का समय परिवर्तन सहित प्रभावितों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इस निर्देश का पालन नही हो रहा है।
