नागरिकता कानून: बच्चों के दिमाग में कौन भर रहा है नफरत का जहर, ये तस्वीरें हैं गवाह

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शनिवार को भी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार समेत देशभर में हिंसा और प्रदर्शन हुए। भीड़ का हिस्सा बनकर शनिवार को रामपुर में उपद्रव और हिंसा करते बच्चों के चेहरे सामने आए। कोई 14-15 साल का है तो कोई 16-17 साल का। बच्चे देश का भविष्य होते हैं और यह भविष्य उज्जवल बनता है, इन बच्चों के बेहतर शिक्षा और संस्कार ग्रहण करने से लेकिन ये सड़क पर उतरकर उपद्रवियों के साथ आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव जैसी समाजविरोधी हरकतों में शामिल हो रहे हैं। इन बच्चों को मालूम होगा कि नागरिक संशोधन कानून क्या है, विरोध की समूची राजनीति क्या और क्यों है…निश्चित ही नहीं।

फिर उनके दिमाग में नफरत का जहर घोलकर सड़क पर उतने को कौन भड़का रहा है। शुक्रवार को भी यूपी के वाराणसी में उपद्रवियों के बीच फंसकर आठ साल के एक बच्चे की मौत हो गई, तो दिल्ली में हिंसा के दौरान कुछ बच्चे पुलिस के हत्थे चढ़ गए। नागरिक संशोधन कानून का विरोध अपनी जगह है लेकिन इस समूचे विरोध के सूत्रधारों को क्या यह एहसास नहीं है कि मासूम दिमागों में हिंसा और नफरत के बीच भरने से वे किस रास्ते जाएंगे और आखिरकार देश कहां जाएगा।

शहर के चारों ओर जुटती रही भीड़, देखती रही पुलिस
आपको बता दें कि नागरिक संशोधन कानून को लेकर मुस्लिम तंजीमों की ओर से बुलाए गए बंद के मद्देनजर पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए थे। शहर ईदगाह की ओर से जाने वाले सभी मार्गों को सील करने के साथ ही बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई, लेकिन भीड़ के सामने पुलिस प्रशासन बेबस नजर आया।

पुलिस भीड़ को रोकने में नाकाम रही। यही वजह रही जो प्रशासन शहर की फिजा बिगड़ने से रोकने में नाकाम रहा। केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध जारी है। इसको लेकर मुसलिम तंजीमों की ओर से शनिवार को बंद का आहवान किया गया था, जिसे देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से तमाम इंतजाम किए गए थे।

शुक्रवार को पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने मौलानाओं एवं मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ बैठक की थी, जिसमें शांति की अपील की थी। मौलानाओं की ओर से भी पुलिस प्रशासन को शांतिपूर्वक आंदोलन करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन रात होते होते शहर के तमाम मुस्लिम धर्मगुरुओं को नजरबंद कर दिया गया।

शाहबाद स्थित ईदगाह की ओर से आने वाले सभी मार्गों को सील कर दिया गया। किसी को भी जाने नहीं दिया जा रहा था, लेकिन इसके बाद भी शनिवार को सुबह से ही ईदगाह निकलने के लिए भीड जुटना शुरू हो गई।

शाहबाद गेट से लेकर बरेली गेट तक, ईदगाह से लेकर नवाब गेट तक, हाथी खाना चौराहों, अजीतपुर समेत शहर के तमाम स्थानों पर भीड़ इकट्ठा हो गई। पुलिस चाहकर भी भीड़ को नहीं रोक सकी।

चारों तरफ तैनात पुलिस फोर्स मूकदर्शक बनी रही। प्रदर्शन के दौरान जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक डॉ अजय पाल शर्मा की ओर से लगातार शांति की अपील की जाती रही, लेकिन भीड़ शांत होने को तैयार नहीं थी।

बाद में भीड़ अपने धर्मगुरुओं को बुलाने पर अड गए, जिसके बाद अलग-अलग तंजीमों के मौलानाओं को शाहबाद गेट तक लाया गया, जहां उन्होंने भीड को समझाने का कार्य किया। किन्तु, इसके बाद भी शहर में बवाल हो गया और शांति व्यवस्था बाधित हो गई। इससे शहर की फिजा भी खराब हो गई।

पुलिस प्रशासन की बदइंतजामी की खुली पोल
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रही भीड को नियंत्रित करने में पुलिस प्रशासन की बदइंतजामी की पोल खुल गई। यहां तक कि साउंड सिस्टम तक के पुख्ता इंतजाम नहीं थे।

शाहबाद गेट पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने साउंड का इंतजाम किया था। गाड़ियों के जरिए मौलाना लोगों से शांति की अपील कर रहे थे, लेकिन दोनों साउंड सिस्टम की बैटरी समाप्त हो गई।

यही नहीं प्रदर्शनकारियों को शांत कराने आए मुस्लिम धर्मगुरुजब बोलना शुरू हुए तो साउंड सही तरीके से काम नहीं कर पा रही थी। यही वजह रही जो लोगों तक आवाज नहीं पहुंच रही थी। ऐसे में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने दिक्कत आई।

हिंसक प्रदर्शन में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उग्र भीड़ ने पुलिस की एक जीप सहित चार दोपहिया वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। पुलिस ने फायरिंग नहीं की है। जिस युवक के गोली लगने की बात कही जा रही है उसे किसी ने आपसी रंजिश में गोली मारी है। उपद्रवी तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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