प्रयागराज नहीं जा सकते तो महानदी में ही कर रहे पिंडदान

जांजगीर-चांपा। धार्मिक नगरी शिवरीनारायण में महानदी, शिवनाथ और जोक नदी का त्रिवेणी संगम है। यहां की मान्यता ठीक उतनी ही है, जितनी गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम स्थल प्रयागराज की है। इसलिए महानदी में अस्थि विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते है। महानदी के त्रिवेणी संगम में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और अटल बिहार वाजपेयी सहित कई राजनीतिक हस्तियों का अस्थि विसर्जन किया जा चुका है। पितृपक्ष के समय भी यहां जिले सहित दूरदराज के लोग पितृ ऋण से मुक्ति पाने श्राद्ध के लिए पहुंचते हैं।

मान्यता है कि प्रयागराज में अस्थि विसर्जन करने से दिवंगत आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है। इसलिए ज्यादातर लोग प्रयागराज जाकर गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम में अस्थि विसर्जन करते हैं, लेकिन जो लोग प्रयागराज नहीं पहुंच पाते, उनके लिए धार्मिक नगरी शिवरीनारायण से होकर गुजरी महानदी, जोंक और शिवनाथ का संगम ही किसी प्रयागराज से कम नहीं है।

कहते हैं कि मन यदि श्रद्घा है तो ईश्वर कहीं भी मिल सकते हैं। उसी तरह अगर लोगों का विश्वास है कि यहां अस्थि विसर्जन से भी प्रयागराज की तरह मृतक की आत्मा को मुक्ति मिलती है। धार्मिक और पवित्र तीर्थ स्थल होने के कारण भी ज्यादातर लोग अस्थि विसर्जन के लिए यहां आते हैं। धार्मिक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख भी है की चित्रोत्पला के त्रिवेणी संगम की ठीक उतनी ही मान्यता है, जितनी प्रयागराज इलाहाबाद की है।

यही वजह है कि यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर अस्थि विसर्जन करते हैं। जिस तरह प्रयागराज में अस्थि विसर्जन से लेकर माला, मुंदरी और प्रसाद सहित अन्य सारा सामान मिलता है उसी प्रकार शिवरीनारायण में भी इस तरह की कई दुकानें खुल गई है जहांसारा सामान मिल जाता है।

माखन साव व राम घाट में अस्थि कुंड

शिवरीनारायण में माखन साव घाट और रामघाट में अस्थि कुंड है, जिसमें अस्थि प्रवाहित की जाती है। पवित्र, पुण्य और मोक्षदायी नारायण क्षेत्र पुण्यदायी नदी चित्रोत्पला गंगा (महानदी) के तट पर स्थित है। इसके अलावा अस्थि विसर्जन के लिए आने वालों की संख्या को देखते हुए नगर पंचायत द्वारा काली मंदिर के पास काली घाट में अस्थि कुंड बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

ओडिशा से भी अस्थि विसर्जन करने आते हैं लोग

लगभग 25 वर्षों से अस्थि विसर्जन कराते आ रहे पंडित लाला दुबे बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भारत में गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम प्रयागराज इलाहाबाद में है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि यहां अस्थि प्रवाहित और पिंडदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसा दूसरा कोई तीर्थ नहीं है, लेकिन शिवरीनारायण में चित्रोत्पला गंगा के तट पर महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी का त्रिवेणी संगम है। इसलिए यहां छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्य ओडिसा और मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में लोग महानदी में अस्थि विसर्जन के लिए आते हैं।

यजमानों का तैयार कर रहे बही खाता

प्रयागराज की तरह यहां भी कर्मकांड कराने वाले पंडित अस्थि विसर्जन के लिए आने वाले अपने यजमानों के परिवार का लेखा जोखा तैयार कर रहे हैं ताकि उनकी नई पीढ़ी उनके पास पहुंचे तो उन्हें भी इसकी जानकारी दी जा सके।

प्रयागराज की तरह मान्यता

महानदी में अस्थि विसर्जन की मान्यता ठीक उतनी ही है, जितनी गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम स्थल प्रयागराज की है। प्रति दिन यहां जिले सहित पूरे प्रदेश के विभिन्ना स्थानों के अलावा ओड़ीसा और मध्यप्रदेश से भी लोग अस्थि विसर्जन के लिए पहुंचते हैं। यहांकई पूर्व प्रधानमंत्रियों सहित राजनीतिक हस्तियों का अस्थि विसर्जन किया गया है। शिवरीनारायण को रामवन गमन मार्गमेंसरकार ने शामिल किया है, इससेनगर कोपर्यटन स्थल के अनुरूप विक सित किया जाएगा साथ ही व्यापारिक दृष्टिकोण से भी नगर का विकास होगा । लोगों की धार्मिक आस्था भी बढ़ेगी।

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