अब अपराधी चाहे कहीं भी छिपे हों, आसान नहीं होगा पहचान छिपाना

रायपुर। अब फरार अपराधी अपनी पहचान छुपाकर कहीं भी छिप नहीं सकते। ऐसे अपराधियों की पहचान अब आसानी से हो सकेगी। दरअसल राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) चेहरा पहचानने वाली तकनीक नेशनल ऑटोमेटेड फेशियल रेकग्निशन सिस्टम (National Automated Facial Recognition System) से लैस होने के बाद दूसरे राज्यों को सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर उपलब्ध करा रहा है। इससे डाटा बेस में सेव देश भर के अपराधियों के फिंगरप्रिंट से घटना स्थल पर मिले फिंगरप्रिंट से मैच कर आसानी से पहचान की जा सकेगी। छत्तीसगढ़ पुलिस एनआरसीबी के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना आने वाले दिनों में शुरू कर देगी।

पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि अपराधियों की पहचान के लिए नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन के सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर एनसीआरबी देश के 20 राज्यों की पुलिस को उपलब्ध करा चुकी है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ पुलिस को भी इस सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। फिंगरप्रिंट और चेहरे से व्यक्ति की पहचान बताने वाला यह सिस्टम कई तरीके से अपराध की जांच और अपराधियों पर शिकंजा कसने में काफी मददगार साबित हो रहा है। इस सिस्टम के शुरू होने से किसी भी अपराधी के लिए अपनी पहचान बदलकर किसी दूसरे नाम से छुपना आसान नहीं होगा। भगोड़े आतंकियों की भी इस सॉफ्टवेयर से आसानी से पहचान हो सकेगी।

लावारिश लाश की पहचान, गुमशुदा बच्चों की खोज में मिलेगी मदद

इस नए हाइटेक सिस्टम से गुमशुदा बच्चों की खोज और लावारिश लाशों की पहचान भी की जा सकेगी। देश के किसी भी हिस्से से ऐसे बच्चों की आसानी से पहचान कर उनके असली माता-पिता के पास पहुंचाया जा सकेगा। इसके साथ ही प्राकृतिक और अन्य दुघर्टना में मारे जाने वाले लोगों की पहचान भी आसानी से हो सकेगी। पुलिस इस सिस्टम के माध्यम से लावारिश लाश मिलने के मामले की जांच आसानी से कर सकेगी।

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