लीज की अवधि बढ़ते ही एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ सरकार को दिए छह सौ करोड़

जगदलपुर। दंतेवाड़ा के बैलाडीला में एनएमडीसी की मार्च 2020 में समाप्त हो रही लौह अयस्क खदानों की लीज की अविध 20 सालों के लिए बढ़ाते ही एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ शासन को छह सौ करोड़ रुपए की पहली किश्त का भुगतान कर दिया है। बीस दिसंबर को इस राशि का चेक सरकार को सौंपा गया। गौरतलब है कि एनएमडीसी पर करीब 16 सौ करोड़ रुपए का जुर्माना दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने लगाया है। पिछले माह एनएमडीसी के सीएमडी एन बैजेन्द्र कुमार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच राजधानी रायपुर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों पक्षों के बीच कई विषयों पर सहमति बनी थी। इसमें एक प्रमुख निर्णय सुप्रीम कोर्ट के कामन कॉल जजमेंट के आधार पर एनएमडीसी पर जुर्माना के रूप में आरोपित राशि में से पहली किश्त में छह सौ करोड़ रुपए जमा करने पर कंपनी ने हामी भरी थी।

इस मामले में सबसे पहले कदम बढ़ाते हुए राज्य शासन द्वारा एनएमडीसी के साथ सहमति के अनुसार बैलाडीला की चार खदानों का पट्टा 17 दिसंबर को मार्च 2040 तक के लिए बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया गया। विदित हो कि एनएमडीसी की बैलाडीला के किरंदुल में दो और बचेली में तीन लौह अयस्क की खदानें हैं। इनमें एक खदान डिपाजिट 11 की लीज अवधि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने 2017 में ही बढ़ा दी थी, बची हुए चार खदानों की लीज वर्तमान कांग्रेस सरकार ने बढ़ा दी है। उधर एनएमडीसी ने भी इसके तीन दिन बार ही 20 दिसंबर को छह करोड़ रुपए की राशि का चेक शासन को सौंपकर अपना वादा निभाया है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का कॉमन काल जजमेंट

सुप्रीम कोर्ट द्वारा डब्ल्यूपी (सी) नंबर 114 साल 2014 से फाइल केस में पारित निर्णय दिनांक दो अगस्त 2017 के तहत उल्लंघनकर्ता पट्टेदारों पर जुर्माना लगाया गया था। कामन कॉल जजमेंट के नाम से चर्चित सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद दंतेवाड़ा कलेक्टर ने एनएमडीसी पर करीब सात हजार करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया था बाद में 15 नवंबर 2019 को संशोधित पत्र जारी कर अकेले बचेली की तीन लौह अयस्क खदानों के लिए कुल 11 अरब, 31 करोड़, 96 लाख, 71 हजार 940 रूपये का का डिमांड नोट थमाया गया था। जिसमें करीब छह सौ करोड़ रूपये जमा करा दिए गए हैं। किरंदुल की दो लौह अयस्क खदानों को लेकर भी करीब पांच सौ करोड़ का जुर्माना लगाने की खबर है।

ज्ञात हो कि कामन काल एक एनजीओ है। जिसने निजी खनन कंपनियों पर लीज क्षेत्र से बाहर जाकर उत्खनन करने का आरोप लगाते ऐसी कंपनियों से जुर्माना वसूलने के निर्देश देने की मांग करते सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। दावा किया जाता है कि यह जजमेंट सरकारी खनन कंपनियों पर लागू नहीं होता पर यहां एनएमडीसी जो सरकारी क्षेत्र की कंपनी है इसके बावजूद पर्यावरण अनापत्ति एवं माइनिंग स्कीम की मात्रा के उल्लंघन का आरोप लगाते जुर्माना लगाया गया है।

बचेली में किस खनिपट्टा में खोदाई पर कितना जुर्माना

1- डिपॉजिट पांच में पर्यावरण अनापत्ति के उल्लंघन के आरोप में अर्थदंड की राशि- 4169711471 रुपए।

2- डिपाजिट 10/11 ए में पर्यावरण अनापत्ति के उल्लंघन के आरोप में अर्थदंड की राशि- 5651800791 रुपए।

3- डिपाजिट 10/11 ए में माइनिंग स्कीम की मात्रा के उल्लंघन में आरोपित राशि- 1498159678 रुपए।

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