जेएनयू कैंपस में हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस वहां मौजूद थी। दिल्ली पुलिस ने कैंपस में होने की बात खुद एफआईआर में लिखी है। रिपोर्ट में पुलिस ने कहा है कि नकाबपोश बदमाश पुलिस के सामने तोड़फोड़ करते रहे। दूसरी तरफ हमलावर इस दौरान कोडवर्ड में बात कर रहे थे।
जांच में ये बात भी सामने आई है कि जेएनयू का माहौल एकदम तनावपूर्ण होने के बजाय धीरे-धीरे खराब हुआ। हालांकि एफआईआर में दर्ज घटना के समय व अधिकारी घटना का जो समय बता रहे हैं उसमें अंतर है। पुलिस ने एफआईआर में कहा है कि पुलिसकर्मी जेएनयू में मौजूद थे। करीब पौने चार बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ छात्र एकत्रित होकर मारपीट व तोड़फोड़ कर रहे हैं।
पुलिसकर्मी वहां पहुंचे तो 40-50 अनजान लोग जिनमें से कुछ लोगों ने अपने मुंह पर मफलर व कपड़े बांधे हुए थे, उनके हाथों में डंडे थे। ये लोग पेरियार हॉस्टल परिसर में छात्रों से मारपीट व तोड़फोड़ कर रहे थे। ये आरोपी पुलिस को देखकर मौके से भाग गए थे। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। छात्रों को शांत होने की अपील की गई थी। इस दौरान जेएनयू के अंदर झगड़े व मारपीट की अन्य कॉल आने लगीं।
शाम सात बजे पुलिस को सूचना मिली कि कुछ हुड़दंगी साबरमती हॉस्टल में पहुंच गए हैं और वहां मारपीट कर रहे हैं। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची तो 50-60 लोग हाथों में डंडे लेकर हॉस्टल बिल्डिंग में तोड़फोड़ कर रहे थे। छात्रों से माइक के जरिए शांत होने की अपील की गई। पुलिस की चेतावनी के बावजूद हुड़दंगी लोग तोड़फोड़ करते रहे। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने किसी आरोपी को पकड़ने की कोशिश नहीं की थी। इस झगड़े में कुछ छात्रों को चोटें आई हैं। पीड़ित छात्रों ने हमलावरों द्वारा कोड वर्ड में बात करने की बात कही है।
