दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को निर्भया की मां द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया है। डेथ वारंट में 22 जनवरी को फांसी की तारीख निर्धारित की गई है। डेथ वारंट के मुताबिक 15 दिन बाद चारों दरिंदों को फांसी हो जाएगी, लेकिन ऐसा पूरी तरह तय नहीं है। डेथ वारंट जारी होने के बाद भी उनके पास कुछ विकल्प बचे हैं, जिसकी मदद से फांसी टल सकती है। यहां पढ़ें अब उनके पास कौन-कौन से रास्ते बचे हुए हैं-
निर्भया के चारों दोषियों ने अब भी एक-एक ‘लाइफलाइन’ बचा रखी है। किसी की दया याचिका, किसी की क्युरेटिव पिटीशन और किसी की पुनर्विचार याचिका के विकल्प बचे हुए हैं। डेथ वारंट जारी होने के बाद भी वे इन कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसके पास केवल क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने का विकल्प है, उनके लिए वह आखिरी रास्ता है, लेकिन जिनके पास पुनर्विचार और दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है, उनका मामला अब भी लंबा खिंच सकता है।
अगर वे सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करते हैं, तो उनके खारिज होने के बाद भी राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर किए जाने का प्रावधान है। राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद-72 के तहत दया याचिका पर सुनवाई करते हैं। इस दौरान राष्ट्रपति गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगते हैं। सरकार अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजती है और फिर राष्ट्रपति दया याचिका का निपटारा करते हैं। अगर राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर देते हैं तो उसके बाद मुजरिम को फांसी पर लटकाने का रास्ता साफ होता है। ऐसे में निर्भया के दोषियों ने अगर राष्ट्रपति से गुहार लगाई, तो फांसी टल सकती है।
