सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत विदेश से काला धन वापस लाने और केंद्रीय मंत्रियों के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर मांगी गई सूचना से संबंधित आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को नोटिस जारी किया है। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की।
व्हिसलब्लोअर और आईएफएस अफसर संजीव ने अगस्त, 2017 में आरटीआई के तहत पीएमओ से विदेश में जमा काले धन को वापस लाने के लिए हो रही कोशिश, कितना धन लोगों के बैंक खातों में जमा कराया गया से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। साथ ही यह भी पूछा गया था कि पीएमओ को कितने केंद्रीय मंत्रियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की शिकायत मिली।
इन शिकायतों के आधार पर कितने मंत्रियों के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई। पीएमओ ने सूचना स्पष्ट न होने के आधार पर इस आवेदन को खारिज किया था। पीएमओ ने यह कहते हुए सूचना नहीं दी थी कि इससे काले धन की जांच प्रभावित होगी और मंत्रियों के मामले में सूचना इतनी अधिक है कि इसे जुटाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है।
इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी), दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ में यह मामला पहुंचा। हाईकोर्ट ने सितंबर, 2019 में इस याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश को संजीव ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। संजीव का कहना है कि हर नागरिक को यह जानने का अधिकार है कि जनप्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार के क्या-क्या मामले हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से संजीव की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए शीर्ष अदालत ने पीएमओ और सीआईसी को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है।
