पेंशन रोकने की धमकी देकर रिटायर्ड शासकीय कर्मचारी से वसूली

 हाई कोर्ट ,60 दिवस के अंदर वसूल की गई रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश

बिलासपुर। जस्टिस गौतम भादुडी ने सेवाकाल के दौरान रिटायर्ड एच एम को किये गये अतिरिक्त भुगतान की राशि को दबाव डालकर जमा कराए जाने को, सार्वजनिक नीति, मौलिक अधिकार एवं संविधान के निहित निर्देश के विपरीत होने पर अँधा कानून माना है। कोर्ट ने शासन को याचिकाकर्ता से वसूली गई राशि 60 दिवस के अंदर 6 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता शंकर नारायण चक्रवर्ती स्कूल शिक्षा विभाग के प्राथमिक शाला तिलकनगर से हेडमास्टर के पद से जून 2019 में सेवानिवृत्त हुए। रिटारमेंट के 2 माह बाद उन्हें विभाग से रिक्वहरी नोटिस प्राप्त हुआ। इसमें कहा गया कि 2013 में वेतन निर्धारण के दौरान उन्हें 1 लाख 50 हजार 113 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया है। उक्त रकम जमा कराए जाने पर ही पेंशन जारी किया जायेगा। याची अपने पेंशनरी लाभ को बचाने के लिए कोषालय में राशि जमा कराया गया। उन्होंने रिटायर्ड शासकीय कर्मचारी से किसी भी प्रकार के अतिरिक्त भुगतान की वसूली अवैध होने पर याचिका दाखिल की।याचिका में जस्टिस गौतम भादुडी की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि पेंशन रोकने की नोटिस देकर याची को एक लाख पचास हजार ११३रुपए जमा करने के लिए मजबूर किया गया। यह सार्वजानिक नीति, मौलिक अधिकार एवं संविधान के निहित निर्देशों के विपरीत वसूली आदेश है, जो अँधा कानून है। सेवाकाल के दौरान किया गया अधिक भुगतान की वसूली हेतु निष्पादित वचनपत्र को बहुप्रयोजन सहमति नही माना जा सकता है। रिटायरमेंट के बाद पेंशन रोकने की धमकी देकर वचनपत्र तैयार किया गया। कोर्ट ने वसूली आदेश रदद् कर याचिकाकर्ता द्वारा जमा करायी गई राशि 60 दिन के अंदर 6 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।

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