स्वास्थ्य विभाग कर रहा है नियमित मॉनिटरिंग
रायगढ़, 29 मार्च 2020
कोरोना वायरस के लिए जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा विदेशों तथा अन्य प्रदेशों की यात्रा से लौटे हुए लोगों को नियमित रूप से ट्रेस कर उनका सतत निगरानी कर, ऐसे नागरिकों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें होम आइसोलेशन तथा सेल्फ क्वारेंटीन में रखा जा रहा है। रायगढ़ जिले में भी अन्य राज्यों की यात्रा कर वापस आए चार हजार 197 लोगों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण कर होम आइसोलेशन एवं क्वारेंटीन में रखा गया। गाईड लाइन के अनुसार होम आइसोलेशन तथा क्वारेंटीन की तिथि पूर्ण करने के बाद आवश्यक जांच-पड़ताल की गई, लेकिन इनमें से किसी में भी कोरोना वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं। फिर भी इन लोगों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित मॉनिटरिंग करते हुए सतत निगरानी में रखा जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि 29 मार्च 2020 तक विदेश से कुल 83 यात्री रायगढ़ जिले में आए थे। जिसमें से सभी लोगों को होम आइसोलेशन एवं क्वारेंटीन में रखा गया है। इनमें 69 यात्रियों को होम आइसोलेशन में रहते 14 दिनों से अधिक हो जाने पर ऐसे यात्रियों में कोरोना संबंधी कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं। शेष 14 यात्री को भी 14 दिनों की आइसोलेशन की अवधि में रखा गया है।
इसी प्रकार 28 मार्च तक कुल 4 हजार 197 व्यक्ति अन्य राज्यों की यात्रा कर जिले में लौटे हैं। इसमें 28 मार्च को 382 लोगों की स्क्रीनिंग कर होम आइसोलेशन में रखा गया। 372 लोगों ने होम आइसोलेशन में 14 दिन पूर्ण कर लिया है तथा उनमें कोरोना वायरस संक्रमण संबंधी कोई लक्षण नहीं पाया गया है। शेष 3825 लोग वर्तमान में होम आइसोलेशन की 14 दिनों की अवधि के तहत अपने-अपने घरों में है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन यात्रियों के घर पहुंचकर नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। नये दिशा-निर्देशों के अनुसार विदेश से लौटे हुए व्यक्ति को अब 28 दिन के होम आइसोलेशन या सेल्फ क्वारेंटीन में रहना होगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन ने ऐहतियाती निर्देश जारी कर कोरोना वायरस के उपचार के लिए अधिकृत मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में स्थित आइसोलेशन वार्ड में बिस्तरों की संख्या 100 तक बढ़ाने के निर्देश दिए है। उक्त आदेश के परिपालन में आईसोलेशन वार्ड की संख्या में वृद्धि की जा रही है। साथ ही मेडिकल इक्विपमेंट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। इसके अतिरिक्त आपातकालीन स्थिति को ध्यान में रखते हुए इलाज के लिए चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के लिए एमबीबीएस अंतिम वर्ष के पास आउट छात्रों को जूनियर रेसीडेंट के रूप में रिक्रूट कर आवश्यक ट्रेनिंग दी जा रही है।
