शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में राशन सामग्री की कीमत अधिक, अधिकारी मौन

कांकेर पखांजुर छत्तीसगढ़

अभी पूरे भारत वर्ष में लाकडॉन कई स्थिति है राज्य सरकार ने दो माह का चावल फ्री में देने का निर्णय तो लिया है पर कुछ दुकान संचालक शक्कर व मिट्टीतेल में ओवररेट का खेल खेलकर मुनाफा कमाने में लगे हुए है इसका जीता जागता सबूत पखांजुर सेवा सहकारी राशन दुकान में देखने को मिला जहा सरकार के निर्धारित दर 17रुपया किलो का शक्कर को 20 रुपया में दिया जा रहा है व मिट्टीतेल को भी अधिक दर पर दिया जाता है मीडिया की टीम पहुंची तो खुद दुकान संचालक ने गलती स्वीकारी और किया गया हितग्राहियों का पैसा वापिस ये खेल कई वर्षों से निरंतर चलते आ रहा है पर विभागी अधिकारी व जिम्मेदार प्रशासन सुध लेने के बजाय चुप्पी साधे बैठे है जिसका खामयाजा सीधा जनता को भुगतना पड़ रहा है या खेल पूरा पखांजुर छेत्र के समस्त राशन दुकानों पर होता है जब राशन दुकान संचालकों से बात की जाती है तो चिल्हर का हवाला दिया जाता है

एक तरफ पूरा देश कोरोना वायरस जैसे महामारी से जूझ रहा है । लाक डाउन करके आम नागरिकों को घरों में सुरक्षित रहने की अपील की है जिसका कड़ाई से पालन किया जा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार गरीब नागरिकों के लिए निशुल्क राशन वितरण कर लोगों को राहत प्रदान किया जा रहा है। किंतु शासकीय उचित मूल्य की दुकानो में सेल्समैन द्वारा शक्कर , मिट्टी के तेल में हितग्राहियों से उचित मूल्य से अधिक राशि ली जा रही है ।वही उचित मूल्य दुकानों में समाग्रियों का दर का कोई सूचना पटल भी नहीं लगाया गया है। जिससे हितग्राहियों को पता चल सके कि निर्धारित शुल्क क्या है। जिनका पूरा लाभ सेल्समैन द्वारा उठाया जा रहा है ।इस तरह का कार्य खुलेआम प्रतिमाह कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंस का पालन करने के लिए चुने का घेरा सर्किल बनाकर रखा गया। मास्क, सेनीटाइजर और डेटोल साबुन का उपयोग करने के लिए निर्देश जारी किया गया है, किंतु सेल्समैन के द्वारा दिशा निर्देश की व्यवस्था तो किया गया, किंतु पालन नहीं किया जाना। जिससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का मामला सामने आ रहा है। एक तरफ शासन-प्रशासन निजी दुकान संचालकों को अधिक कीमत में खाद्य सामग्री बेचते पाये जाने पर उन दुकानों को सील कर दिया जा रहा है। किंतु खुलेआम शासकीय उचित मूल्य की दुकानों पर अधिक राशि हितग्राहियों से वसूली करना क्या लाजमी है। इस बात से साफ पता चलता है की किस तरह सरकार की आंखों में धूल झोंक कर आम नागरिकों से खाद्य सामग्री से अधिक राशि लेना भ्रष्टाचार को इंगित कर रहा है। शासन प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है जो उचित नहीं है। जी हां हम बात कर रहे है कांकेर जिले मुख्यालय की नगर पंचायत पंचायत क्षेत्र अंतर्गत पखांजुर के राशन दुकान में जीता जागता सबूत भी देखने को मिला ऐसे ही स्थिति पूरे छेत्र का है सेल्समैन स्वयं इस बात को कबूल कर रहे है।अब देखने वाली बात यह है कि निजी दुकानदारों पर कार्यवाही तो कर रहे हैं परन्तु शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर भी कार्यवाही हो पाएगा कि नही ।यह समय के गर्भ में हैं, क्योंकि हर व्यक्ति देश के नागरिक है और सब को मौलिक अधिकार प्राप्त है।

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