किसके इशारे पर लॉकडाउन तोड़ जमा हुई भीड़? विनय दुबे तो मोहरा, असली वजह कुछ और

मुंबई। मुंबई के बांद्रा स्टेशन पास मंगलवार शाम हुए जमावड़े पर मुंबई पुलिस अभी भी अंधेरे में तीर मार रही है। इस बात का पता अभी नहीं चल पा रहा है कि किसके इशारे पर लॉक डाउन तोड़कर इतने लोग अचानक इकट्ठा हो गए। जिन लोगों पर अब तक कार्रवाई की गई है, उनसे इस घटना का संबंध भी जुड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। साथ ही, इस घटना पर सियासत भी थम नहीं रही है।

बांद्रा स्टेशन के पास 14 अप्रैल की शाम जमा हुई करीब 3000 लोगों की भीड़ किसके इशारे पर जमा हुई, इसका पता अभी तक पुलिस नहीं लगा पाई है। एक उत्तरभारतीय छुटभैया नेता एवं एक पत्रकार की गिरफ्तारी जरूर हुई है। लेकिन इन दोनों से इस घटना के तार जोड़ना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। छुटभैया नेता विनय दुबे को उसके द्वारा जारी किए गए एक वीडियो के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। लेकिन वह इस वीडियो में 14 अप्रैल नहीं, बल्कि 18 अप्रैल को प्रवासी मजदूरों को उत्तर प्रदेश ले जाने की बात करता दिखाई दे रहा है। वह लोगों से 18 अप्रैल को मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर इकट्ठा होने की बात करता दिखाई दे रहा है, जहां से वास्तव में उत्तर भारत की ज्यादातर ट्रेनें छूटती हैं। जबकि भीड़ जमा हुई उस बांद्रा स्टेशन पर, जहां से लंबी दूरी की कोई ट्रेन छूटती ही नहीं। उस भीड़ में भी उक्त छुटभैया नेता के समुदाय के लोग भी न के बराबर ही थे।

बांद्रा में जमा हुई भीड़ का एक जिम्मेदार एक मराठी खबरिया चैनल की मंगलवार सुबह प्रसारित हुई एक खबर को भी बताया गया। इसके आधार पर उक्त चैनल के उस्मानाबाद स्थित एक रिपोर्टर को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। लेकिन उस चैनल के संपादक की ओर से भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यह समाचार दक्षिण-मध्य रेलवे द्वारा तैयार किए उस प्रस्ताव के आधार पर दिखाई गई थी, जो लॉक डाउन में ढील दिए जानेवाले क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया था।

चैनल की ओर से यह सवाल भी उठाया गया है कि जब इसी प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस पार्टी दिल्ली में केंद्र सरकार पर आरोप लगा सकती है, तो कांग्रेस की ही महाराष्ट्र में चल रही सरकार उसी प्रस्ताव के आधार पर खबर चलाने वाले रिपोर्टर को आरोपी कैसे बना सकती है ? उक्त चैनल ने यह भी कहना है कि बांद्रा के जमावड़े के तुरंत बाद उसकी ओर से राज्य सरकार की क्षमताओं पर सवाल उठाया गया था। इसलिए उसे निशाना बनाया जा रहा है।

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने मुंबई के पुलिस आयुक्त को एक वीडियो क्लिप भेजकर उसकी जांच की मांग की है। उक्त क्लिप में बांद्रा स्टेशन के बाहर जमा कुछ लोगों द्वारा किसी के आने पर पैसा मांगने की बात की जा रही है। भाजपा नेताओं का सवाल है कि उक्त क्लिप में किसके आने की बात की जा रही है ? यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि घर जाने के लिए निकले लोग बिना सर-सामान के कैसे बांद्रा लोकल ट्रेन के स्टेशन पर पहुंच गए ? जबकि वहां से कोई लंबी दूरी की ट्रेन जाती ही नहीं।

पूरे महानगर में पुलिस की सख्ती के बावजूद इतने लोगों के एक स्थान तक पहुंचने पर भी सवाल उठाया जा रहा है। जबकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का निजी आवास मातोश्री भी वहां से एक किलोमीटर की ही दूरी पर स्थित है। लेकिन शिवसेना को ये सवाल हजम नहीं हो रहे हैं। उसके प्रवक्ता संजय राऊत ने दिल्ली के भाजपा नेता कपिल मिश्र पर आरोप लगाया है कि वह इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं।

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