लाॅकडाउन के दौरान बच्चों ने की गुड्डे-गुड़ियों की शादी
गरियाबंद 28 अप्रैल 2020
अक्षय तृतीया के दिन बच्चों द्वारा गुड्डे-गुड़ियांे का विवाह पारम्परागत तौर से आयोजित किया जाता है। इस दिन परम्परा के निर्वहन में छत्तीसगढ़ सहित भारत के अन्य प्रदेशो में गुड्डे गुड़ियों का विवाह किया जाता है। इसके पीछे लोकमंगल की कामना कार्य करती है। पहले घर पर ही गुड्डे गुड़िया बनाये जाते थे पर आज वर्तमान में बाजार में सुन्दर सुन्दर गुड्डे गुड़िया एवं उनके परिधान के साथ विवाह की सामग्री भी मिल जाती है। इसी लोक परंपरा को निभाते हुए गरियाबंद जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने अक्षय तृतीया के अवसर पर लाॅकडाउन अवधि में भी अपने दायित्वों का सफलता पूर्वक निर्वहन किया। उन्होंने अपने परिक्षेत्र में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण व फैलाव को रोकने हेतु जारी समस्त उपायों के साथ घर-घर संपर्क किया व परिवार के बड़े, बुजुर्गो व बच्चो के साथ मिलकर गुड्डे गुड़ियांे की शादी रचाई। बच्चों ने पारंपरिक तरीके से आम पत्ते का तोरण तैयार कर मंडप सजाया वहां हल्दी खेली और पुतरा यानी गुड्डे की बारात निकालकर मंडप में पुतरी यानी गुड्डी से उसका ब्याह रचाया। यह पर्व बच्चो के लिए बेहद खास रहा। बच्चो ने एक दूसरे को हल्दी लगाई और जमकर नाचे भी। दिनभर शादी की रस्मों के साथ बारात परघानी, सातफेरा, टिकावन और विदाई की परंपरा का निर्वाह किया गया। इस प्रकार जगह जगह पर बच्चों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने गुड्ड़े गुड़ियों की शादी का आयोजन किया।
महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती जगरानी एक्का से प्राप्त जानकारी अनुसार गुड्डे गुड़ियों की शादी का आयोजन संस्कार अभियान गतिविधि का भी केन्द्र रहा इस आयोजन के साथ बच्चो को शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा से जोड़ा गया। जहां एक ओर वर्तमान में लाॅकडाउन अवधि में आंगनबाड़ी केन्द्र नही खुल रहे है, वही दूसरी ओर बच्चो के शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा को सुचारू रूप से संचालित करना आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका की महती जिम्मेदारी बन गई है। इस जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए उनके द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चो से आम पत्ते का तोरण बनाने की गतिविधि कराई गई। जिससे बच्चो के छोटी मासपेशियों का विकास हो सके। पत्तो के माध्यम से बच्चो ने छोटे व बड़े चीजो को पहचानना सीखा। इसके माध्यम से बच्चो ने चीजों को क्रमबद्ध रूप से जमाना सीखा। पत्तो के माध्यम से बच्चो ने सीधा व उल्टा का ज्ञान भी पाया। इस प्रकार कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने लोक परम्परा को बच्चो के अनौपचारिक शिक्षा से जोड़ा। इस पूरी गतिविधि में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियेजना व सभी पर्यवेक्षकों का मार्गदर्शन मिलता रहा।
