विजयवाड़ा से नेपाल के लिए साइकिल से निकले दो युवक, इसलिए आए थे इंडिया

सुकमा. कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण (Covid-19) को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन (Lockdown) के कई साइड इफेक्ट दिखाई दे रहे हैं, जिसमें सबसे ज्यादा परेशान मजदूर लोग हो रहे हैं. आवागमन पुरी तरह ठप्प है और ऐसे में घर कि चिंता उन्हे सता रही है. उनका सब्र भी टूट रहा है, लिहाजा ऐसे ही दो युवा जो नेपाल के लिए विजयवाड़ा से अपने घर के लिए साईकिल पर रवाना हो गए, लेकिन छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा में उन्हें बॉर्डर पर रोका गया और क्वारंटाइन के लिए भेज दिया गया. दोनो युवकों ने कहा कि उन्हें खाना तो मिल रहा है, लेकिन परिवार वालों की चिंता हो रही है. क्योंकि वो कमाई नहीं करेंगे तो घरवालों को पैसे कहा से भेंजेंगे.

करीब दो माह पहले काम करने के लिए नेपाल के लुम्बनी जिले के बुटावल गांव के निवासी गंगाधर व सेंडजा गांव निवासी लक्ष्मण विजयवाड़ा आए हुए थे. वो दोनों हर वर्ष यहां पर मजदूरी करने आते हैं. कुछ माह यहां मजदूरी करने के बाद वो घर लौट जाते हैं. उनका परिवार बहुत ही गरीब है, लिहाजा यहां हुई कमाई उनके लिए काफी महत्वपूर्ण है. ऐसे में दोनों युवक यहां आए कुछ ही दिन हुए थे, तभी कोरोना वायरस की महामारी और लॉकडाउन के कारण उनका काम बंद हो गया.

इसलिए टूटा सब्र का बांध

दोनों युवकों ने बताया कि वे इसी आस में थे कि कुछ दिन में हालात सामान्य हो जाएंगे, लेकिन पैसे खत्म हो चुके थे और वहां का प्रशासन सुध नहीं ले रहा था. ऐसे में दोनों के सब्र का बांध टूट गया और वे साइकिल लेकर नेपाल जाने के लिए निकल पड़े. भूखे-प्यासे दोनों कोंटा बॉर्डर पहुंचे तो यहां उन्हें रोक दिया गया. स्वास्थ्य जांच के बाद दोनों युवकों को क्वारंटाइन के लिए केन्द्र भेज दिया गया. अब दोनों युवक यहीं पर रह रहे हैं.

परिजनों के साथ 6 माह की बेटी की सता रही चिंता

युवक गांगाधर का कहना है कि उसकी 6 माह की बेटी है और उसकी पत्नि परिजनों के साथ रह रही है. हर साल की तहर इस बार भी पैसे कमाने के लिए यहां पर आया था, लेकिन कोरोनो के कारण वो फंस गया है. ऐसे में गंगाधर को अपने परिवार की चिंता है. दूरभाष पर अपने परिजनों से बात करते हुए रो पड़ा गंगाधर ने बताया कि वो बहुत गरीब है ऐसे में एक-एक दिन की कमाई उसके लिए काफी अहमियत रखती है. अब इसी उम्मीद के साथ दोनो युवक कह रहे है कि जल्द लाक डाउन खुले और वे अपने घर पहुंचे.

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