रायपुर. देश के पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर 21 मई को छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ी योजना शुरू की है. इसे राजीव गांधी किसान न्याय योजना (Rajiv Gandhi Kisan NYAY Yojana) नाम दिया गया है. इसके तहत प्रदेश के करीब 19 लाख किसानों को 4 किश्तों में 5 हजार 750 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. सरकार का दावा है कि पहली किश्त 1500 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी गई है. इसे राज्य सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जा रहा है. अब समझने की कोशिश करते हैं कि क्या ये सच में कोई नई योजना है और क्या इस योजना से हर किसान के साथ बराबर न्याय हो रहा है?
वादा और तकरार
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में किसानों से 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का का वादा किया था. भारी बहुमत से चुनाव में मिली जीत के बाद पहले साल सरकार ने ये वादा पूरा किया, लेकिन 2019-20 की खरीदी के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच तकरार हो गई. केंद्र सरकार ने राज्य से साफ कहा कि यदि केंद्र द्वारा तय समर्थन मूल्य पर धान नहीं खरीदा गया तो वे छत्तीसगढ़ का चावल सेंट्रल पूल में नहीं खरीदेंगे. इसके पीछे अनुबंध और शर्तों का हवाला दिया गया. कुछ दिन तक केंद्र और राज्य के बीच इसको लेकर तकरार की स्थिति बनी रही
फिर आई न्याय योजना
आखिरकार राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा तय 1815 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मोटा और 1835 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पतला धान खरीदने का निर्णय लिया और किसानों को आश्वासन दिया कि वायदे के अनुसार 2500 रुपये की अंतर राशि को किसी अन्य माध्यम से किसानों को देंगे. किसानों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देंगे. नवंबर 2019 से फरवरी 2020 तक धान की खरीदी की गई. इसी बीच भूपेश बघेल सरकार ने राज्य के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया. इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इस साल विधानसभा के बजट सत्र में धान के अंतर की राशि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से देने का निर्णय हुआ.
योजना में किसको क्या मिला?
न्याय योजना का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना से राज्य के किसानों के जीवन में खुशहाली का नया दौर शुरू होगा. योजना से लाभान्वित होने वालों में 90 प्रतिशत लघु-सीमांत किसान अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं गरीब तबके के हैं. इस योजना की प्रथम किश्त की राशि 1500 करोड़ रूपये हम सीधे किसानों के खाते में डाल रहे हैं. योजना के तहत राज्य के 19 लाख किसानों को इस वर्ष 5750 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इसके अंतर्गत धान की खेती के लिए किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपये तथा गन्ना की खेती के लिए प्रति एकड़ 13000 रुपये की सहायता दी जाएगी.’
क्या हर किसान के साथ बराबर न्याय हुआ?
राज्य सरकार के एक अधिकारी बताते हैं कि धान के मामले में हर किसान के साथ एक जैसा निर्णय नहीं है. ये औसत के आधार पर तय की गई राशि है. मसलन ‘मान लीजिए मेरे पास एक एकड़ खेत है और सरकार ने मुझसे तय सीमा अधिकतम 15 क्विंटल मोटा धान 1815 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा है. जिससे मुझे 27 हजार 225 रुपये तत्काल दिया गया. जबकि 2500 रुपये के हिसाब से मुझे 37 हजार 500 रुपये मिलने थे. यानी कि अंतर की राशि 10 हजार 225 रुपये प्रति क्विंटल. इसी तरह पतले धान के लिए मुझे 27 हजार 525 रुपये भुगतान किए गए. दोनों परिस्थितियों में मुझे 10 हजार रुपये ही मिलेंगे. और यदि मैंने प्रति एकड़ 10 या 12 क्विंटल धान ही बेचा है तो भी 10 हजार रुपये ही मिलेंगे. इससे कुछ किसानों को फायदा तो कुछ को नुकसान होगा.’
एक आंकड़े के मुताबिक इस योजना के तहत धान फसल के लिए 18 लाख 34 हजार 834 किसानों को प्रथम किश्त के रूप में 1500 करोड़ रुपये की राशि दी गई. राज्य सरकार ने अब तक करीब 82 लाख मिट्रिक टन धान खरीदा है. इसमें कई लाख ऐसे किसान हैं, जिन्होंने 100 से 500 एकड़ तक में मोटा धान की खेती की थी. इन किसानों को नुकसान होगा.
दायरे में आएंगे ये किसान भी
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूरों को ‘न्याय’ योजना के द्वितीय चरण में शामिल करने का निर्णय लिया है. इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी गई है. यह समिति दो माह में विस्तृत कार्ययोजना का प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगी. इनको किस तरह योजना का लाभ दिया जाएगा, इस पर फिलहाल कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है.
