रायपुर. भारत देश को श्रमवीरों का देश कहा जाता है. कोरोना काल में श्रमवीरों की दयनीय स्थिति किसी से छुपी नहीं, आज सड़कें श्रमिकों की समस्याओं से लाल हो रहे हैं. ये श्रमवीर भूखे-प्यासे, नंगे पांव हजारों किलोमीटर पैदल ही नाप दे रहे हैं. स्थिति यह हैं कि अपने ही देश में श्रमवीरों को प्रवासी कहा जाने लगा है. हर राज्य अपने ही राज्य के दीगर राज्यों में फंसे श्रमवीरों को प्रवासी श्रमिक मानकर कार्य कर रहा है. सारी योजनाओं से लेकर सरकारी आदेशों तक में श्रमवीर प्रवासी श्रमिक हो गए हैं.
मगर इन सब बातों के बीच जानकारी यह कि छत्तीसढ़ में अब तक 1.26 लाख श्रमिकों की वापसी हो चुकी है. तो वहीं कुल पंजीयन के आकड़ों पर नजर डाले तो यह 2.84 लाख है. इमने दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों के अलावा छात्र, तीर्थयात्री, पर्यटक, उपचार कराने गए लोग सहित अन्य लोग शामिल हैं. छत्तीसगढ़ राज्य में बाकी फंसे हुए लोगों को लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अब तक कुल 53 ट्रेनों का शैड्यूल तय किया गया है.
36586 श्रमिक लौटे ट्रेनों के माध्यमों से
छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में श्रमवीरो की चिंता में जिम्मेदार दुबले होते जा रहे हैं. दिखाया ऐसा जा रहा हैं कि श्रमिकों की चिंता कर जिम्मेदारों को निंद नहीं आ रही है. मगर आपको जानकर हैरानी होगी की छत्तीसगढ़ में 1.26 लाख लोगों के वापसी के आंकड़े जारी किए गए हैं जिनमें से 36586 को ही 26 ट्रेनों के माध्यम से लाया गया है. बाकी कैसे आए, किन-किन परेशानियों से गुजरते हुए अपने राज्य-अपने गृह जिले तक पहुंचे अब यह मत पूछिएगा, क्योंकि दिखाया ऐसा जा रहा है कि श्रमवीरों की चिंता कर के जिम्मेदार दुबले होते जा रहे हैं. दूसरे राज्यों में फंसा हर व्यक्ति यह चाह रहा हैं कि कैसे भी कर के उसकी वापसी हो जाए, जहां जिसे जो इंतजाम मिल रहा है उसी के सहारे लोग वापसी के लिए निकल रहे हैं. अधिकांश स्थानों पर श्रमवीरों के हौसले पैदल ही सड़कों को नाप रहे हैं. ऐसे में देश में लगाए जाने वाले नारे ‘श्रम शक्ति राष्ट्र शक्ति’ के क्या मायने है आप आसानी से समझ सकते हैं.
श्रमिकों का लौटना और संक्रमण का खतरा
छत्तीसगढ़ में बीते एक साप्ताह में कोरोना के जितने भी मरीज मिले हैं अधिकांश दूसरे राज्यों से लौटे हुए थे या फिर उनके साथ सीधे संपर्क में थे. ऐसे में कुल 2.84 लाख में से 1.26 लाख के लौटने के बाद शेष बचे 1.58 लाख के लौटने पर कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि देश में दिन प्रतिदिन स्थिति गंभीर होते जा रही है. रोज नए मरीजों के सामने आने के रिकॉर्ड टूट रहे हैं. ऐसी स्थिति में आने वाला समय कैसा होगा यह कहना काफी मुश्किल हो चुका है. हालांकि छत्तीगढ़ में अन्य राज्यों के फंसे करीब 50 हजार लोगों की भी वापसी अनुमानित किय गया है.
अंतर्राज्यीय बसों पर रोक
छत्तीसगढ़ में कोरोना के लगातार बढ़ते संक्रमण के बीच राज्य परिवहन प्राधिकार के अध्यक्ष डॉ. कमलप्रीत सिंह ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, आंध्रप्रदेश, और महाराष्ट्र के परिवहन आयुक्तों को पत्र भेज अंतर्राज्यीय सेवा स्थगति करने की जानकारी दी है. डॉ कमलप्रीत सिंह के द्वारा पत्र में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम और लॉकडाउन 4.0 के चलते अंतर्राज्यीय बस सेवा स्थगित रहने की जानकारी दी गई है. पत्र में यह फैसला आगामी आदेश तक स्थगित रखने की जानकारी दी गई है.