गर्मी के तीन महिनों में स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मिला आय का जरिया
रायपुर, 28 जून 2020

एक ओर जहां दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर से गुजर रही थी वहीं दूसरी ओर जय अंबे स्व सहायता समूह की महिलाएं खेतों में सब्जी उगाकर अपने परिवारों के लिए आय का जरिया प्रदान कर रही थी। गर्मी के दिनों में चिलचिलाती धूप और कोरोना संक्रमण काल की विषम परिस्थितियों में भी ग्राम नोनबिर्रा के स्व सहायता समूह की दस महिलाएं खेतों में सामूहिक सब्जी उत्पादन करके बीते तीन महिनों में एक लाख बीस हजार रूपये की सब्जियां बेचीं। कोरोना काल में जहा आय का कोई साधन नजर नहीं आ रहा था। उस समय समूह की महिलाएं सब्जी उगाकर अपने परिवारों के लिए भरण-पोषण का नया स्त्रोत पैदा कर रहीं थीं। कोरबा जिले के करतला ब्लाक के ग्राम नोनबिर्रा के जय अंबे स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष श्रीमती रजनी पटेल ने बताया कि गर्मी के दिनों में खेत खाली पड़े रहते हैं, ऐसे खेतों को हम सब्जी उगाने की योजना में शामिल करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि गांव के ही करीब डेढ़ एकड़ पट्टा जमीन को तीन महिने के लिए खेती करने के लिए उपयोग में लिये। खेतों में सिंचाई की व्यवस्था के लिए बोरवेल की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा 15 हजार रूपये चक्रीय निधि तथा एक लाख रूपये का लोन उन्हें प्रदान किया गया था।
समूह की अध्यक्ष श्रीमती पटेल ने बताया कि हमारे समूह की दस महिलाओं ने मिलकर सामूहिक खेती करने के लिए गर्मी के सीजन में खाली पड़े जमीन पर सब्जी की फसल लेना शुरू किए। गर्मी के सीजन में खेतों में भिंडी, करेला, लौकी, बैगन, मिर्ची आदि सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय बाजारों, रजगामार बाजार तथा खुले में बेचकर विगत तीन महीनों में सवा लाख रूपये से ज्यादा का आय प्राप्त कर चुके हैं। जय अंबे स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि गर्मी के सीजन में तथा कोरोना महामारी के दौर में खेतों में उगाये सब्जी हमारे परिवार के आय का जरिया बना है। लाॅकडाउन में काम-धंधे ठप्प पड़े थे ऐसे में सामूहिक खेती के द्वारा की गई सब्जी उत्पादन से पैसे की आवक ने हम सभी के परिवार की दैनिक जीवन की जरूरतों को पूरा कर दिया है। आय का जरिया बनने से हमारे परिवार के सभी सदस्य बहुत खुश हैं। सब्जी बेचकर कमाए हुए पैसे से जरूरत के सामानों के साथ-साथ अन्य आवश्यक चीजें भी खरीद पा रहे हैं। समूह की महिलाओं ने बताया कि बच्चों के कपड़े और राशन की भी जरूरत खेती की आमदनी से पूरी हो पाई है।
