हर साल मिलेंगे साढ़े चार हजार करोड़ रुपए…प्रदेश में 3 नई कोल खदानों में हाेगी कमर्शियल माइनिंग

प्रदेश के कोल खदानों से कमर्शियल माइनिंग को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार के बीच सहमति बन गई है। शुक्रवार को सीएम भूपेश और केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी की बैठक हुई। राज्य सरकार ने हसदेव अरण्य क्षेत्र के जिन पांच कोल ब्लाॅकों को बदलने की मांग की थी, उस पर केंद्र ने सहमति दे दी है। साथ ही प्रदेश सरकार की तरफ से तीन नए कोल ब्लॉक देने की हरी झंडी दी गई है। इन खदानों में कमर्शियल माइनिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन खदानों को रिप्लेस करने भूपेश सरकार पिछले डेढ़ साल से केंद्र पर दबाव बनाए हुए थे, जिनमें मोरगा दक्षिण, मोरगा-2, मदनपुरनार, सियांग और फतेहपुर इस्ट शामिल है। इससे पहले बैठक में सीएम ने हसदेव अरण्य, माड़ नदी और लेमरू एलीफेंट प्रोजेक्ट में आ रहे कोयला खदानों की नीलामी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले फेस में 5 खदानें आ रही है। मुख्यमंत्री ने जोशी बताया कि 3900 वर्गकिमी के क्षेत्र में अत्यंत घने जंगल हैं। यहां खनन की अनुमति देने से न सिर्फ पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा बल्कि हसदेव बांगो डैम को भी नुकसान पहुंच सकता है। इस पूरे क्षेत्र में लेमरू एलीफेंट रिजर्व प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। सीएम ने बताया कि हाथियों की समस्या है और एलीफेंट रिजर्व क्षेत्र घोषित होने से इस पर काबू पाया जा सकता है। यह भी कहा कि इलाके में 64 कोयला खदानें हैं, जिनमें से 5 की नीलामी के लिए केंद्र ने अधिसूचना जारी कर दी है।

कोयला खनन छत्तीसगढ़ में नया युग शुरू करेगा: जोशी
बैठक में तय किया गया कि ने छत्तीसगढ़ पूर्व रेलवे लिमिटेड (सीईआरएल) की एक रेलवे लाइन की शिफ्टिंग के लिए 15 दिनों में सीआईएल, राज्य सरकार और माइनिंग अधिकारियों की एक समिति द्वारा एक प्रस्ताव प्राप्त किया जाएगा। एक महीने में एक प्रस्ताव सीएमपीडीआई और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा डंपिंग फ्लाई ऐश के लिए खनन भूमि का उपयोग करने के लिए भी प्रस्तुत किया जाएगा। कोयला के खुदरा उपभोक्ताओं को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य एक नोडल एजेंसी बनाएगा।

केंद्र से 4140 करोड़ की लेवी जल्द मिलेगी

बैठक में सीएम भूपेश ने वर्ष 2014 के पूर्व एडीशनल लेवी के रूप में केंद्र के पासजमा 4140 करोड़ रुपए राज्य को देने की मांग की। जिस पर कोयला मंत्री जोशी ने सहमति व्यक्त करते हुए यह बताया कि केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट में उक्त राशि के डिस्पोजल हेतु आवेदन लगाया गया है, उसके आधार पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के कॉमन कॉस प्रकरण में जुर्माने की राशि 10 हजार 129 करोड़ रुपए राज्य को देने की मांग रखी। बघेल ने गारे पेल्मा खदानों में एसईसीएल को उत्पादन बढ़ाने, साथ ही खदानों में जमा पानी का उपयोग जनहित में पेयजल एवं सिंचाई प्रयोजन के लिए करने की अनुमति मांगी। एसईसीएल की बंद पड़ी खदानों में फ्लाई-ऐश के डिस्पोजल के लिए उपयोग की मांग रखी। इन मांगों पर केन्द्रीय मंत्री ने सहमति जताई है।

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