रायपुर. प्रदेशभर में राज्य सरकार राशन दुकानों में कार्ड संख्या घटाकर उसे सीमित करने की तैयारी में है। कार्ड संख्या घटने के साथ जिलों में नई राशन दुकानें शुरू करने और फिर नए लोगों को दुकानों की चाबी सौंपने की खबरें हैं। राज्य शासन की इस नई व्यवस्था ने सीधे तौर पर पुराने समय में दुकान संभाल रहे संचालकों के माथे पर पसीना छोड़ने मजबूर कर दिया है। दरअसल सरकार की पैरैलल स्कीम में पुरानी दुकानों में दर्ज कार्डधारियों की संख्या सीधे आधी कर दी जाएगी। पुरानी दुकान से हटाए कार्ड नए दुकान में दर्ज किए जाएंगे, इस तरह से हटाए जाने वाले कार्डधारियों को पुराने के बजाए नई दुकान से राशन मिलेगा। इस तरह से पुराने समय में डिपाजिट देकर राशन वितरण का काम उठाने वाले संचालकों को सीधे नुकसान होगा। उन्हें मिलने वाले कमीशन का खर्च ही इतना कम हो जाएगा, जिससे दुकान के संचालन के लिए परेशानी बढ़ जाएगी। प्रदेश में इस वक्त 12 हजार 523 उचित मूल्य की दुकानें संचालित हैं। लिमिट स्कीम के तहत प्रत्येक दुकान में सिर्फ 500 कार्डधारियों की ही एंट्री होगी। इस स्कीम से यह भी माना जा रहा है, दुकानों में जब संचालकों का मुनाफा कटेगा, तब कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। इसके पहले जोगी शासनकाल में 1000 राशनकार्ड वाली दुकानों की व्यवस्था होने से असल हितग्राहियों को परेशान होना पड़ा था।
न्यूनतम 800, अधिकतक 4000 कार्डधारी इस समय संचालित होने वाली उचित मूल्य की दुकानों में कार्डधारियों की संख्या अलग-अलग है। आबादी देखते हुए कई दुकानें ऐसी हैं, जहां 4000 कार्डधारियों की एंट्री है। वहीं कई दुकानें ऐसी हैं, जहां कार्डधारियों की न्यूनतम संख्या 800 तक में है। जिन जगहों की राशन दुकानों में पैरैलल सिस्टम काम करेगा, वहां और नई दुकानें शुरू होंगी। 25 हजार रुपये के खर्च पर संभाल रहे दुकानें राशन दुकान के कुछ संचालकों से बातचीत में उन्होंने बताया, इस समय एक दुकान संचालित करने 25000 रुपये तक का खर्च सामान्य है। सेल्सकर्मी, हेल्पर, फर्नीचर के साथ उचित मूल्य की दुकान के सेटअप में इतना खर्च तय है। अगर दुकानों में कार्ड संख्या आधी हो गई, तो संचालकों के लिए यह राशि भी निकाल पाना मुश्किल होगा। पैरेलल स्कीम में ऐसी नई व्यवस्था देहात के हिस्सों में 3753 नई राशन दुकानें शहरी क्षेत्र के हिस्से में 1147 नई राशन दुकानें पूरे प्रदेश में 4900 नई दुकानें नई जगहों से संचालित होगी कालाबाजारी बढ़ने का डर सरकार की नई याेजना में कार्ड संख्या कम होती है, तो दुकानों में कालाबाजारी होने का डर है। नई व्यवस्था में पुराने संचालकों को सीधे नुकसान होगा। होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कालाबाजारी की स्थिति आगे मुसीबत बढ़ा सकती है। -नरेश बाफना, अध्यक्ष, पीडीएस संघ
