सुशांत सिंह मामला – आरोपी को जांच एजेंसी चुनने का अधिकार नहीं….सुप्रीम कोर्ट

सुशांत सिंह राजपूत मामले की जांच सीबीआई से कराने को मंजूरी देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह नियमित व्यवस्था नहीं हो सकती। हर मामले की जांच सीबीआई को नहीं जा सकती। ऐसा विशेष परिस्थितियों और अपवाद के तौर पर ही हो सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा, जांच एजेंसी चुनने का अधिकार आरोपी को नहीं दिया जा सकता।

जस्टिस ऋषिकेश रॉय की एकलपीठ ने 35 पेज के फैसले में लिखा, आम लोगों का सरकारी जांच एजेंसी पर भरोसा कायम रखने के लिए ही कोई मामला सीबीआई या अन्य किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपा जाता है। कोर्ट ने पत्रकार अर्णब गोस्वामी मामले में दिए अपने फैसले का जिक्र करते हुए कहा, जांच एजेंसी तय करने का अधिकार आरोपी को नहीं दिया जा सकता।
गौरतलब है कि सुशांत के पिता केके सिंह की ओर से पटना में दर्ज एफआईआर में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती व छह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। रिया ने सुप्रीम कोर्ट से पटना में दर्ज एफआईआर मुंबई ट्रांसफर करने की मांग की थी, ताकि इसकी जांच मुंबई पुलिस कर सके।

महाराष्ट्र सरकार की दलील हुई खारिज, फैसला इतिहास में दर्ज
सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्यायिक इतिहास में दर्ज हो गया। पहली बार एकलपीठ ने संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल किया। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट को विशेष अधिकार मिलता है कि वह संपूर्ण न्याय के लिए कोई भी आदेश पारित कर सकता है।

जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने अपने फैसले में कहा, जांच पर भरोसा कायम रखने और संपूर्ण न्याय को ध्यान में रखते हुए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल जरूरी था। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की उस आपत्ति को नकार दिया कि एकलपीठ इस विशेषाधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

सिंघवी ने कहा था, अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कम से कम दो जजों की पीठ ही कर सकती है। जस्टिस रॉय ने कहा, कोर्ट के लिए ऐसी कोई कानूनी बाधा नहीं कि वह विशेषाधिकार का इस्तेमाल न करे। संविधान में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि रोस्टर के तहत किसी मामले की सुनवाई कर रही एकलपीठ के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

कई अहम मामलों में हुआ अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट कई अहम मामलों में अपने इस विशेषाधिकार का इस्तेमाल करता रहा है। कोयला खदान आवंटन घोटाला, भोपाल गैस त्रासदी, हाईवे पर शराब पर प्रतिबंध, आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग आदि मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकार का इस्तेमाल किया है। अयोध्या मामले में भी पूर्ण न्याय देने के मकसद से अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल किया था।

महाराष्ट्र सरकार नहीं दे सकेगी फैसले को चुनौती
महाराष्ट्र सरकार लगातार इस मामले में सीबीआई जांच का विरोध कर रही थी। उसका कहना था कि मामला मुंबई पुलिस के पास रहने दिया जाए। राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने के फैसले को चुनौती देने के लिए छूट मांगी, सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। इसके चलते अब महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनौती भी नहीं दे पाएगी।

जल्द ही मुंबई पहुंचेगी सीबीआई टीम, हत्या के एंगल से होगी जांच
सुशांत सिंह राजपूत मामले में हरी झंडी मिलते ही सीबीआई ने जांच की तैयारी तेज कर दी है। सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ ने कहा, एक-दो दिन में सीबीआई टीम जांच के लिए मुंबई पहुंचेगी। बिहार पुलिस में दर्ज एफआईआर के आधार पर सीबीआई हत्या के एंगल से जांच बढ़ा सकती है। इस बीच, महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि राज्य सरकार सीबीआई जांच में पूरी मदद करेगी।

सीबीआई ने बिहार सरकार के सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद ही गुजरात कैडर के आईपीएस मनोज शशिधर के नेतृत्व में टीम गठित की थी। सीबीआई महाराष्ट्र पुलिस से अब तक की गई जांच तथा इस बारे में जुटाए साक्ष्य लेगी। सीबीआई इस मामले में जब्त मोबाइल सहित तमाम गैजेट्स, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, घटनास्थल के फोटोग्राफ लेगी।

मुंबई पुलिस से सभी 56 लोगों के बयान का रिकॉर्ड भी लिया जाएगा। सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में रिया चक्रवर्ती, उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती, मां संध्या चक्रवर्ती, भाई शोविक, सुशांत के मैनेजर सैमुअल मिरांडा और श्रुति मोदी को आरोपी बनाया है।

उद्धव सरकार को झटका, हुई बैठक
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाविकास अघाड़ी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। भाजपा सहित विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है साथ ही गृहमंत्री अनिल देशमुख का इस्तीफा मांगा है। फैसला आने के बाद मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमवीर सिंह ने गृहमंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री सहित वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के साथ बैठक की।

सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। इस बीच देशमुख ने कहा, कोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच को गलत नहीं ठहराया है। उन्होंने आदेश के पैरा 34 का हवाला देते हुए कहा, राज्य सरकार इस पर विचार करेगी। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में मुंबई पुलिस की समांतर जांच की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

25 जुलाई: सुशांत के पिता ने पटना में रिया व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
27 जुलाई: मुंबई पुलिस ने फिल्म निर्माता महेश भट्ट का बयान दर्ज किया।
29 जुलाई : रिया ने पटना में दर्ज एफआईआर को मुंबई ट्रांसफर करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी।
31 जुलाई : प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।
4 अगस्त:  बिहार सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की।
6 अगस्त : सीबीआई ने मामले में ताजा एफआईआर दर्ज की।
7 अगस्त: केंद्र सरकार ने मामले में पक्षकार बनने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी।
8 अगस्त: रिया की याचिका के खिलाफ सुशांत के पिता केके सिंह ने याचिका दायर की।

10 अगस्त: रिया ने मीडिया ट्रायल के खिलाफ नई याचिका दायर की।
11 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने रिया की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
19 अगस्त: शीर्ष अदालत ने सीबीआई को मामले की जांच सौंपने का फैसला दिया।

साबित हो गया कि हम बिल्कुल सही थे: बिहार डीजीपी
बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा, आज साबित हो गया कि बिहार पुलिस बिल्कुल सही थी और मुंबई पुलिस ने अवैध तरीके से व्यवहार किया। शीर्ष अदालत के फैसले ने लोगों का अदालतों में विश्वास और मजबूत किया है और यह सुनिश्चित किया है कि सुशांत मामले में न्याय जरूर मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती पर उनकी कोर्ट में दी गई दलीलों को लेकर निशाना साधा।

पांडे ने कहा, रिया को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। दरअसल, रिया ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बिहार सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। रिया ने कहा था कि चूंकि बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं और मुख्यमंत्री इस मामले में शामिल हैं, इसलिए पुलिस ने पटना में एफआईआर दर्ज की है।

रिया हर जांच एजेंसी का सामना करने को तैयार: वकील
अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानशिंदे ने कहा कि उनकी मुवक्किल हर जांच एजेंसी का सामना करने को तैयार हैं। जिस तरह रिया ने ईडी और मुंबई पुलिस का सामना किया है, उसी तरह वह सीबीआई जांच का भी सामना करेंगी। मानशिंदे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहा, सभी तथ्यों और परिस्थितियों को जांचने के बाद साफ है कि खुद रिया ने भी सीबीआई जांच की मांग की थी और वह भी मामले में न्याय चाहती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दो राज्यों के बीच राजनीतिक मतभेदों के चलते यह मामला सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। चूंकि अब कोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया है, रिया भी जांच में सहयोग करेंगी। रिया ने कहा कि जो भी एजेंसी जांच करे, सच सामने आना चाहिए।

सात दिन से कम रुके तो नहीं होंगे क्वारंटीन : बीएमसी
सुशांत मामले की जांच के लिए आए पटना एसपी को क्वारंटीन करने वाले बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने सीबीआई टीम को इससे छूट दी है। बीएमसी आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने कहा, यदि सीबीआई टीम सात दिनों के लिए आती है तो उसे अनिवार्य क्वारंटीन के नियम से छूट दी जाएगी। यदि वे सात दिन से ज्यादा के लिए आते हैं तो उन्हें छूट लेने के लिए ईमेल या लिखित आवेदन देना होगा। इस पर हम उन्हें छूट दे देंगे।

बिहार चुनाव के चलते हो रही थी बयानबाजी : कांग्रेस
कांग्रेस का कहना है कि अभिनेता सुशांत सिंह मामले में बिहार चुनाव पर नजर रखकर ही भाजपा नेताओं की बयानबाजी हो रही थी। पार्टी का कहना है क्या भरोसा है कि सीबीआई मामले की जांच सही और समय पर करे। केंद्र सरकार को मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग करनी चाहिए थी।

बिहार कांग्रेस के प्रभारी और सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा, भाजपा नेता मुंबई पुलिस को गलत ठहराकर वहां की सरकार पर चुनावी बयानबाजी कर रहे थे। जबकि सच्चाई है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस से अब तक की कार्रवाई को लेकर जो दस्तावेज मांगे थे उसकी पड़ताल के बाद ही आदेश में लिखा कि मुंबई पुलिस गलत नहीं थी। कोर्ट की टिप्पणी मुंबई पुलिस के खिलाफ नहीं आई है। इसलिए जो भाजपा नेता अपनी मनमर्जी से मुंबई पुलिस को गलत बता चुनावी बयान दे रहे थे उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

फैसले के बाद सुशांत के पैतृक गांव में खुशी का माहौल
सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच सीबीआई से कराए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बिहार के पुर्णिया जिले में स्थित सुशांत के पैतृक गांव मलडीहा के लोगों ने स्वागत किया है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसले पर खुशी जताई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जानने के लिए ग्रामीण सुबह से टीवी पर टकटकी लगाए बैठे थे। सीबीआई जांच का फैसला सुनते ही लोग खुशी से झूम उठे। सुशांत के पैतृक घर में उनके चाचा अपने परिवार के साथ रहते हैं।

फैसले पर उनके चचेरे भाई पन्ना सिंह ने कहा कि इस मामले पर कोर्ट का फैसला गांव के साथ ही पूरी दुनिया के लिए एक अच्छी खबर है। सुशांत को न्याय मिल सके इसके लिए ग्रामीणों ने दिन-रात पूजा की। गांववालों को कहना है कि सुशांत बहुत ही मजबूत इंसान थे वह आत्महत्या नहीं कर सकते। उन्हें उम्मीद है कि अब मामले में न्याय मिलेगा।

 

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