किसानों के विरोध के बीच कानून में बदले तीनों कृषि बिल, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लगाई मुहर

नई दिल्ली: जिन कृषि विधेयकों का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है, वो अब कानून में बदल गए हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विधेयकों पर मुहर लगा दी है. अब ये विधेयक कानून हो गए हैं. बारी अब विधेयकों को लागू करने की है. बता दें कि इन तीनों विधेयकों का भारी विरोध हो रहा है. पंजाब हरियाणा, सहित उत्तर भारत में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. ट्रेनें तक रोकी जा रही हैं

इन विधेयक के चलते केंद्र सरकार में मंत्री हरसिमरत कौर ने मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था. इसके बाद उनकी पार्टी अकाली दल ने बीजेपी का साथ भी छोड़ दिया. एनडीए में 24 साल से शामिल इस दल ने बीजेपी से इसी बिल के चलते नाता तोड़ लिया है. अकाली दल ने केंद्र सरकार को किसान विरोधी बताया है. इस बिल का संसद में भी भारी विरोध हुआ था. इसके चलते कई सांसद निलंबित भी किए जा चुके हैं. विपक्ष भी बिल का विरोध कर रहा है

इसके साथ ही विधेयकों का भारी विरोध भी हो रहा है. पंजाब में सैकड़ों महिलाएं रेलवे ट्रैक पर बैठ धरना प्रदर्शन कर रही हैं. 25 सितम्बर को ही भारत बंद भी बुलाया गया था. किसानों की मांग है कि इन विधेयकों को वापस लिया जाये. किसानों को डर है कि अब कानून बने ये विधेयक न्यूनतम समर्थन मूल्य ख़त्म कर देंगे. एक बिल में अनाज जैसी चीज़ों को आवश्यक चीज़ों की सूची से बाहर कर दिया गया है. यानी अब अनाज का कोई भी कितना भी भंडारण कर सकता है. किसान इसका भी विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे जमाखोरी बड़े पैमाने पर हो सकती है.

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