Rekha Birthday Special: रेखा कहती हैं, ‘बंबई (अब मुंबई) उस वक्त जंगल जैसा था और मैं एकदम निहत्थी थी। यह मेरे जिंदगी का सबसे डरावना वक्त रहा। मैं दुनिया के सभी नए रास्तों से अनजान थी। लोग मेरी अज्ञानता का फायदा उठाने की कोशिश करते। मैं महसूस करती थी कि आखिर मैं यहां कर क्या रही हूं? मुझे तो स्कूल में होना चाहिए! आइसक्रीम खानी चाहिए, मजे करने चाहिए, अपने दोस्तों के साथ रहना चाहिए। आखिर मुझे काम करने के लिए बाध्य क्यों किया जा रहा है? आखिर मुझे उन सामान्य चीजों से क्यों वंचित किया जा रहा है जो अक्सर बच्चे मेरी उम्र पर करते हैं? हर रोज मैं रोती थी क्योंकि मुझे वह चीजें खानी पड़तीं जिन्हें मैं पसंद नहीं करती। विचित्र कपड़े पहनने पड़ते जो मुझे परेशान करते थे। तरह-तरह की पोशाकें और गहनों से मुझे बहुत एलर्जी होती। बालों पर किया गया स्प्रे नहाने के बाद भी नहीं उतरता था। मुझे एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक धक्के देकर, या फिर यूं कहें कि घसीट कर ले जाया जाता था। बहुत सी ऐसी चीज रहीं जो डरावनी थीं और मैंने मात्र 13 साल की उम्र में कीं।’
रेखा (Rekha) उस सफर की मुसाफिर रही हैं जिसमें मंजिलें तो तमाम आईं लेकिन घर नहीं आया। पैदाइश तमिलनाडु की और नाम हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में चलता है। उनकी बातों को सुनकर लगता है कि वह कभी अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थीं। लेकिन, जब बन गईं तो ऐसी बनीं कि उनके सामने और कोई टिक ही नहीं पाया। यहां एक बात और सिद्ध होती है कि अगर किसी काम को कोई मजबूरी में भी मन लगाकर करें तो उसमें भी महारत हासिल किया जा सकती है।
