दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने अमृतसर के गोल्डन टेंपल में की शुकराना अदा, गुरु तेग बहादुर साहिब के शहीदी पर्व पर भव्य आयोजन

अमृतसर
 दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता आज श्री हरमंदिर साहिब पहुंची और माथा टेका। उन्होंने श्री हरमंदिर साहिब की परिक्रमा में स्थित छबील पर जुठे बर्तनों को साफ करने की सेवा की जहां मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी उनके साथ मौजूद रहे।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि आज श्री गुरु हरिमंदिर साहिब में माथा टेकने आए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अरदास की थी कि गुरु तेगबहादुर जी का 350 साला आयोजित कार्यक्रम सुख-शांति के साथ पूर्ण हो। इसके पूर्ण होने पर वह श्री गुरु रामदास जी के दर पर आए हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब का 350 शहीदी पर्व पूरे देश में मनाया जाना तय हुआ तो हमने दिल्ली में, जहां गुरु साहिब की शहादत हुई, वहीं बड़ा आयोजन किया। पूरी तैयारी के साथ दिल्ली सरकार ने व दिल्ली एसजीपीसी ने दिल्ली में समागम किया। जहां लोगों व श्रद्धालुओं ने सिर निवाया।

हमने शुरुआत में यही सोचा था कि ये कार्यक्रम गुरु साहिब के आशीर्वाद से ठीक-ठाक हो, कोई भी दिक्कत या परेशान किसी भी श्रद्धालु को ना आए।

कुछ दिन पहले ही लाल किले के पास आतंकी हमला हुआ था, इसलिए मन में थोड़ा डर था। लेकिन, गुरु साहिब की शहादत को नमन करने के लिए दिल्ली सरकार ने ये कार्यक्रम रखा और उनके आशीर्वाद से ये कार्यक्रम सही तरीके से हुआ।

उनकी शहादत को आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें, इसलिए पूरा साल दिल्ली सरकार अलग-अलग कार्यक्रम करवाएगी।

CM रेखा गुप्ता क्या बोली?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि लाल किले में आयोजित 350 सालों की शताब्दी समागम के बाद वे विशेष रूप से गुरुद्वारा साहिब में शुकराना करने आए हैं। रेखा गुप्ता ने कहा कि जब दिल्ली में ब्लास्ट हुआ था, उस समय मन बहुत घबरा गया था और उन्होंने गुरु साहिब के आगे अरदास की थी कि इतना बड़ा दिहाड़ा सुरक्षित और शांति से मन जाए।

गुरु साहिब की कृपा से शताब्दी बड़े ही सुचारू और पवित्र ढंग से मनाई गई, और संगत ने भरपूर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली कमेटी के सहयोग से यह ऐतिहासिक दिहाड़ा मनाया गया। साथ ही, गुरु साहिबान की जीवनी और इतिहास पर आधारित कई पुस्तकों का प्रकाशन भी किया गया है, जिससे बच्चों को अपने विरसे और इतिहास से जोड़ने में मदद मिलेगी।

सीस गंज साहिब, जहां गुरु साहिब का महान बलिदान हुआ और लाल किला, जहां इतिहास गवाह है, इन दोनों स्थानों ने इस शताब्दी समागम को और भी विशेष बना दिया।

 

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