अजीबोगरीब…:16 साल के लड़के ने 18 महीने से नहीं किया मल त्याग

कोई व्यक्ति महीनों तक मल त्याग न करे, यह सुनने में असंभव लगता है लेकिन मुरैना में एक 16 साल का लड़का इस अजीबोगरीब समस्या से 18 महीनों से जूझ रहा है। युवक का उसके परिजन ने मुरैना-ग्वालियर के डॉक्टर्स, नीम-हकीम, वैध तक से इलाज कराया लेकिन उसे कोई लाभ नहीं हुआ। हैरान करने वाली बात यह है कि इसके बाद भी लड़का पूरी तरह से स्वस्थ व सामान्य है। उसे पेट दर्द तो छोड़िए गैस बनने तक की शिकायत नहीं हुई।
मुरैना शहर के सबजीत का पुरा में रहने वाला आशीष (16) पुत्र मनोज चांदिल सामान्य लड़कों की तरह दिखता है। लेकिन 18 महीने पहले उसे अजीबोगरीब समस्या पैदा हो गई। दोनों समय पेटभर भोजन करने के बाद भी उसके शरीर ने मल त्यागने की क्रिया ही बंद कर दी। शुरुआत के दो-चार दिन परिजन ने सोचा कि वैसे ही कोई दिक्कत हो गई लेकिन धीरे-धीरे एक महीने और फिर एक साल बीत गया। लड़के के पिता मनोज ने उसे जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. योगेश तिवारी, चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. बनवारीलाल गोयल, मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल में पदस्थ गेस्ट्रॉलोजिस्ट डॉ. सक्सेना, जेएएच के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. आरएलएस सेंगर सहित नीम-हकीम, वैधों को भी दिखाया। आशीष के पेट का एक्सरे, अल्ट्रासाउंड सहित आंतों की जांच पूरी तरह से नॉर्मल आईं। डॉक्टर ने उसका महीनों तक इलाज भी किया लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

दोनों टाइम भरपेट भोजन, फिर भी कोई समस्या नहीं
आशीष ने दैनिक भास्कर से चर्चा में बताया कि मैं दोनों टाइम भरपेट भोजन करता हूं। परिवार के अन्य सदस्यों की तरह सुबह-शाम 10 से 12 रोटियां खाता हूं, सब्जी-तरकारी, दूध-दही, घी सभी चीजें खाता हूं लेकिन कभी मुझे शौच जाने की जरूरत ही महसूस नहीं होती। हां शुरुआत में एकाध बार पेट में हल्का दर्द हुआ लेकिन वह भी अपने आप ठीक हो गया।
इलाज कराकर थक चुके पिता बोले- समझ नहीं कहां जाऊं
बेटे आशीष की अजीबोगरीब समस्या से दुखी पिता मनोज चांदिल ने दैनिक भास्कर को बताया कि हमने डॉक्टर से लेकर वैध, नीम-हकीमों तक को दिखाया। बेटे की परेशानी दूर करने के लिए तीन-चार बार एनीमा तक लगवा लिया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। अब समझ नहीं आ रहा कि इसे कौन से डॉक्टर को दिखाऊं।
मेटाबॉलिज्म रेट अधिक होने से होती है ऐसी परेशानी
आशीष का इलाज कर चुके चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. बनवारीलाल गोयल नेउसे लेकर परिजन मेरे पास आए थे। मैंने उसका इलाज भी किया लेकिन इसके बाद वे फॉलोअप के लिए नहीं आए। मैने इस केस की स्टडी की है जो दवाइयां मैने दी, अधिकांशत: उन्हीं दवाईयों को अन्य डॉक्टर ने रिपीट किया। कई बार मेटाबॉलिज्म रेट अधिक होने की वजह से ऐसे कॉम्पलीकेशन होते हैं।

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