देश के कई राज्यों में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर शुरू हो चुकी है. दिल्ली कोरोना संक्रमण के तीसरे स्टेज से गुजर रही है. संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी भी आज कुछ राज्य के मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं. कई राज्यों में बार फिर प्रतिबंध लगाने की चर्चाएं तेज हो चली हैं. इस बीच कुछ राज्यों में प्रशासनिक प्रतिबंध और आंशिक कर्फ्यू लग भी चुका है
पिछले कुछ हफ्तों के दौरान कई राज्यों में बाजारों से भीड़-भाड़ वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिनमें सोशल डिस्टेंसिंग के नियम बड़े पैमाने पर टूटते दिखाई दे रहे हैं.इसकी वजह से ही कोरोना वायरस के दोबारा संक्रमण के तेजी से फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि अगर देश में एक बार फिर लॉकडाउन लगा तो क्या होगा?
दिवाली और त्योहारों के बीतने के बाद भी बाजारों में काफी भीड़ नजर आ रही है, लेकिन इसका असर खरीदारी में अब तक नजर नहीं आया है. अगर गूगल मोबिलिटी ट्रेंड के आंकड़ों पर गौर करें तो बाजार अब भी कोविड से पहले के स्तर की खरीदारी तक नहीं पहुंच पाए हैं. इसके लिए 3 जनवरी से 6 फरवरी 2020 तक और लॉकडाउन के बाद 17 नवंबर तक पांच सप्ताह के आंकड़ों में तुलना की गई थी
इस दौरान पता चला कि दिवाली की शाम खरीदारी चरम पर थी, लेकिन यह जनवरी से फरवरी के दौरान पांच सप्ताह के आंकड़ों से 17 प्रतिशत कम रही. दरअसल, लॉकडाउन के बाद फार्मेसी और ग्रॉसरी की खरीदारी तो काफी बढ़ी, लेकिन बाकी सेक्टरों के हालात लगातार बिगड़ते चले गए.
देश में 25 मार्च से लगे लॉकडाउन के बाद कई सेक्टरों में नौकरियों में संकट मंडराने लगा था और उस दौरान काम-धंधे ठप होने की वजह से हजारों लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ीं. ऐसे में अगर देश में दोबारा लॉकडाउन लगता है तो बेरोजगारी के हालात काफी बदतर हो सकते हैं.
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अगर देश में नया लॉकडाउन होता है तो कई ऐसे सेक्टर तबाह हो जाएंगे, जो अब तक उबर नहीं पाए हैं. ऐसे में अगर डिमांड और सप्लाई प्रभावित होगी तो उसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. साथ ही, लोगों की आय और व्यय का हिसाब-किताब भी पूरी तरह गड़बड़ा जाएगा.
