राजस्थान में भीषण जल संकट: 205 शहर-कस्बे प्रभावित, जयपुर-अजमेर में पानी की किल्लत

जयपुर

भीषण गर्मी के बीच राजस्थान में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रदेश के 315 शहरों और कस्बों में से 205 इलाके इस समय जल संकट की चपेट में हैं। इनमें 30 शहरों और कस्बों में तीन दिन में एक बार, जबकि 24 स्थानों पर चार दिन में एक बार पानी की सप्लाई हो रही है। राजधानी जयपुर और अजमेर जैसे बड़े शहरों में भी पाइपलाइन के टेल एंड क्षेत्रों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने ग्रीष्मकालीन आकस्मिक कार्यों हेतु 210.71 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसके अलावा टैंकरों के माध्यम से पेयजल परिवहन के लिए 105 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किए गए हैं। सरकार ने प्रत्येक जिला कलेक्टर को एक-एक करोड़ रुपये का इमरजेंसी फंड भी उपलब्ध कराया है, ताकि जहां जलापूर्ति बाधित हो वहां तत्काल राहत कार्य कराए जा सकें।

जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने बताया कि प्रदेश के 41 जिला सर्किलों में जल जीवन मिशन के कार्यों के संचालन और निगरानी के लिए प्रत्येक जिले को 25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

वर्तमान में मकराना, लाडनूं, बांदीकुई, दौसा, बालोतरा और भोपालगढ़ में पेयजल की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। सरकार का दावा है कि जल संकट प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर सप्लाई और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बाड़मेर में पानी के अभाव में गायों की मौत के मामले सामने आए हैं। कई शहरों और गांवों में लोगों ने जल संकट को लेकर प्रदर्शन भी किए।

बाड़मेर में प्यास से गायों की मौत
बाड़मेर जिले के देरासर गांव में पिछले कुछ दिनों में 10 से अधिक गायों की मौत होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की मुख्य पेयजल आपूर्ति स्रोत बाड़मेर लिफ्ट कैनाल करीब एक महीने से बंद है। भीषण गर्मी के बीच हैंडपंप और भूजल स्रोत भी सूख चुके हैं।

रामदियों की बस्ती क्षेत्र से सामने आए वीडियो में सूखे जलाशय के पास गायों के शव दिखाई दिए। एक गाय खाली पानी की टंकी में मृत मिली। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद करीब दस दिनों तक गांव में पानी का टैंकर नहीं पहुंचा।

ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने भी गांव में गंभीर जल संकट की पुष्टि की है। प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए टैंकर भेजने और मवेशियों की मौत की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

बाड़मेर बना देश का सबसे गर्म इलाका
बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में पिछले करीब 20 दिनों से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। इस सीजन में बाड़मेर में तापमान 48.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो पिछले 31 वर्षों में मई के शुरुआती दिनों का सबसे अधिक तापमान बताया जा रहा है।

बीकानेर और नहरी इलाकों में भी संकट
इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) की नहरबंदी खत्म होने के बाद बीकानेर में पानी की आपूर्ति शुरू तो हुई है, लेकिन हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। कई क्षेत्रों में दो से तीन दिन में एक बार पानी मिल रहा है। टेल एंड इलाकों में कम दबाव की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोग निजी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं, जहां 1000 लीटर पानी के लिए 600 से 800 रुपये और बड़े टैंकर के लिए 1500 से 2000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।

किसानों पर भी असर
सूरतगढ़, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि सिंचाई जलापूर्ति प्रभावित होने से खरीफ सीजन की कपास बुवाई प्रभावित हो रही है। हनुमानगढ़ जिले में भी नहरबंदी के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या बनी हुई है।

पूर्वी राजस्थान में भी हालात खराब
मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर की कई कॉलोनियों में चार दिन तक पानी नहीं आ रहा है। मंगलवार को यहां महिलाओं ने नियमित जलापूर्ति की मांग को लेकर विरोध जताया। लोगों का कहना है कि उन्हें 800 रुपये तक खर्च कर निजी टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं। डीग जिले के कई गांवों में महिलाएं रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर कुओं से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत बनी टंकियां तैयार होने के बावजूद नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हुई।

अजमेर में भी प्रदर्शन
अजमेर शहर में भी अनियमित पेयजल आपूर्ति के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूटा। यहां सरकारी पंप हाऊस के बाद लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मटके फोड़कर जलदाय विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। लोगों का आरोप है कि चार दिन में केवल एक बार, वह भी कम दबाव से पानी मिल रहा है। हालांकि जलदाय विभाग का कहना है कि अधिकांश क्षेत्रों में 48 घंटे के अंतराल से पानी की आपूर्ति की जा रही है और पाइपलाइन कार्यों के कारण कुछ अस्थायी तकनीकी दिक्कतें आई हैं।

जल संकट पर सियासत भी तेज
जल संकट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर जोधपुर संभाग की स्थिति को “जल आपातकाल जैसी” बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अतिरिक्त टैंकर, पानी की ट्रेन चलाने और अवैध बूस्टर पंप व पानी चोरी पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

 

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