ममता चंद्राकर, कुलपति, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़. राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति बेहद समृद्ध है, लेकिन संरक्षण और संवर्धन की दिशा में पर्याप्त पहल नहीं होने से यह विलुप्त होते जा रही थी। पिछले दो सालों में राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ियों को ऐसा जगाया है कि अब यहां की कला और संस्कृति ने पूरे विश्वभर में अपनी पहचान बना ली है। जमीनी स्तर पर कला और संस्कृति को समझना और फिर कलाकारों के जरिये उसे प्रोत्साहित करने का काम राज्य की भूपेश सरकार ने बखूबी किया है। आज मैं यह कह सकती हूं कि छत्तीसगढ़ के कलाकारों को काफी काम भी मिल रहा है और वे कला के जरिये अपने परिवार का जीवन-यापन कर रहे हैं।
पिछले दो दशक पहले जब छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया था, तब ऐसी उम्मीद की गई थी कि यहां की कला और संस्कृति को बचाने के लिए ठोस पहल होगी, लेकिन यह काम राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने दो साल के कार्यकाल के भीतर ही कर दिखाया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की बागडोर संभालने के बाद न सिर्फ यहां के तीज-त्योहारों को पूरे विश्वभर में पहचान दिला दी है। वहीं कलाकारों के दर्द को समझते उन्होंने एक मंच भी तैयार कर दिया है। इस मंच के जरिये गांव-गांव में कला और संस्कृति को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ियां जाग चुके हैं। यही कारण है कि जो लोग हमारी संस्कृति को नहीं समझते थे, वे भी आज समझने लगे हैं। 45 सालों से गूंज रहा है अरपा-पैरी की धार
पूरे प्रदेश में अरपा-पैरी की धार गीत पिछले 45 सालों से गूंज रहा है, लेकिन इस गीत को सम्मान देने का काम भी मुख्यमंत्री श्री बघेल ने किया है। आज यह छत्तीसगढ़ का राज्य गीत हो चुका है। स्कूलों से लेकर प्रशासनिक कार्यक्रमों की शुरूआत इस गीत के साथ होने लगी है। सरकार की एक कोशिश से यह गीत पूरे देशभर में गूंजने लगा है। इसी तरह छत्तीसगढ़ी फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए भी राज्य सरकार लगातार पहल कर रही है। इस दिशा में एक आयोग भी बनाए जाने की पहल की जा रही है। यही नहीं प्रदेश के व्यंजनों को भी बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गढ़कलेवा को राज्य के हर जिलों तक पहुंचा दिया है। यहां छत्तीसगढ़ व्यंजनों का लोग लुफ्त उठा रहे हैं और संस्कृति को काफी नजदीक से समझ भी रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के मूलमंत्र को लेकर काम कर रही यह सरकार अपने उद्देश्यों में सफल होगी।
