जयपुर
जयपुर रेंज में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और हादसों में होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के लिए पुलिस ने एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। जयपुर रेंज पुलिस महानिरीक्षक (IG) राहुल प्रकाश के निर्देशन में Operation Safer Roads” नाम का एक अभिनव सड़क सुरक्षा पहल शुरू की गई है। इस पहल के तहत जयपुर रेंज के प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के उन दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है, जहां बीते 3 वर्षों में सबसे ज्यादा हादसे और मौतें दर्ज की गई हैं। सबसे खास बात यह है कि पुलिस डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण कर इन 93 ब्लैक स्पॉट्स को सीधे Google Maps प्लेटफॉर्म से इंटीग्रेट कर दिया गया है, ताकि वाहन चालक जैसे ही इन इलाकों के करीब पहुंचेंगे, उनके मोबाइल में अलर्ट बज जाएगा।
यह आधुनिक तकनीक न केवल ड्राइवरों को पहले से सचेत करेगी, बल्कि उन्हें वाहन की गति धीमी करने और सुरक्षित ड्राइविंग के लिए भी जागरूक करेगी। इससे जयपुर, सीकर, अलवर और दौसा जैसे जिलों से गुजरने वाले लाखों यात्रियों का सफर बेहद सुरक्षित हो जाएगा।
3 साल का विश्लेषण- 7 जिलों में 93 ब्लैक स्पॉट
जयपुर रेंज पुलिस द्वारा वर्ष 2023 से 2025 तक के एक्सीडेंट डेटा, पुलिस रिकॉर्ड और ट्रैफिक रिपोर्ट्स का गहन अध्ययन किया गया। इस डेटा एनालिसिस में दुर्घटनाओं की संख्या से ज्यादा वहां हुई मानव क्षति की गंभीरता को प्राथमिकता दी गई।
रेंज के 7 जिलों में कुल 93 दुर्घटना संभावित स्थान चिह्नित किए गए हैं:
कोटपूतली-बहरोड़: 17 स्थान
A, B और C श्रेणी में बांटे गए रिस्क जोन
सड़क सुरक्षा संसाधनों का सटीक उपयोग करने और वाहन चालकों को आसानी से समझने योग्य चेतावनी देने के लिए पुलिस ने इन 93 स्थलों को तीन श्रेणियों में विभाजित कर Google Maps और QR Code के साथ जोड़ा है:
Red (लाल) — A Type (High Risk Zone): कुल 06 स्थान चिह्नित। ये वे स्थान हैं जहां पिछले 3 वर्षों में हादसों के कारण 20 से अधिक लोगों की जान गई है।
Orange (नारंगी) — B Type (Medium Risk Zone): कुल 30 स्थान चिह्नित। इन स्थानों पर पिछले 3 वर्षों में 10 से 20 जनहानि दर्ज की गई हैं।
Yellow (पीला) — C Type (Low Risk Zone): कुल 57 स्थान चिह्नित। ये वे डेंजर स्पॉट हैं जहां पिछले 3 वर्षों में 5 से 10 के बीच मौतें हुई हैं।
QR Code स्कैन करते ही दिखेगा पूरा मैप
आम जनता, ट्रांसपोर्टर्स और दैनिक यात्रियों के लिए जयपुर रेंज पुलिस ने एक विशेष QR Code व्यवस्था विकसित की है। इस QR कोड को किसी भी स्मार्ट फोन या Google द्वारा स्कैन करते ही स्क्रीन पर गूगल मैप खुल जाएगा, जहां रेड, ऑरेंज और येलो कलर के स्पॉट दिखाई देंगे।
इस व्यवस्था के जरिए चालक यात्रा शुरू करने से पहले ही अपने पूरे रूट के रिस्क स्पॉट्स को देख सकते हैं और उसी अनुसार अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।
कैसे काम करेगा यह अलर्ट सिस्टम?
तकनीकी एकीकरण के दूसरे चरण में जयपुर रेंज पुलिस ने अपना सत्यापित जियोस्पेशियल डेटा गूगल की टेक्निकल टीम के साथ साझा किया। आवश्यक टेस्टिंग के बाद इसे Google Maps के नेविगेशन सिस्टम में लाइव कर दिया गया है।
अब जब भी कोई व्यक्ति गाड़ी चलाते समय Google Maps ऑन रखकर नेविगेट करेगा, तो चिह्नित A, B या C श्रेणी के ब्लैक स्पॉट के 500 मीटर से 1 किलोमीटर के दायरे में पहुंचते ही ऐप के माध्यम से वॉयस और स्क्रीन पर पॉप-अप रोड सेफ्टी अलर्ट मिलेगा। यह चेतावनी मिलते ही ड्राइवर तुरंत अपनी स्पीड नियंत्रित कर सकेगा।
हर 3 महीने में होगा रिव्यू
पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह पहल केवल लिस्ट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा बेस्ड एविडेंस पुलिसिंग का बेहतरीन उदाहरण है। जयपुर रेंज पुलिस हर 3 महीने में एक्सीडेंट आंकड़ों का पुनः विश्लेषण करेगी। यदि किसी नए स्थान पर दुर्घटनाएं बढ़ती हैं, तो उसे लिस्ट में जोड़कर Google Maps पर अपडेट किया जाएगा।
पुलिस ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे अलर्ट मिलने पर ओवरस्पीडिंग से बचें, सीट बेल्ट और हेलमेट का अनिवार्य उपयोग करें और थकान या मोबाइल उपयोग के दौरान ड्राइविंग करने से बचें।
