चंडीगढ़
शहर के भविष्य से जुड़े कई अहम फैसलों पर आज दिल्ली में मंथन होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बदलावों के साथ पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने, व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने और मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इन फैसलों का सीधा असर शहर के विकास, संपत्ति व्यवस्था और नगर निगम के कामकाज पर पड़ सकता है।
यूटी प्रशासन की ओर से गृह सचिव रामनदीप बराड़, मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, वित्त सचिव दीपर्वा लाकरा और उपायुक्त निशांत कुमार यादव के बैठक में शामिल होने की संभावना है। अधिकारी प्रस्तावों पर प्रस्तुति देंगे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के साथ इनमें बदलाव या नए सुझाव भी दिए जा सकते हैं।
मास्टर प्लान में ऊंची इमारतों का रास्ता होगा साफ
मास्टर प्लान-2031 में संशोधन को लेकर प्रशासन ने ड्राफ्ट अधिसूचित कर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित बदलावों में चिन्हित परिधीय और फेज-3 क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाकर 3.0 करने का प्रावधान है। वहीं चयनित बाहरी सेक्टरों, फेज-3 और औद्योगिक क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों को मंजूरी देने का प्रस्ताव है।
औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में बड़े प्लाटों को विभाजित करने, फेज-1 से बाहर स्कूल-कालेज और सांस्कृतिक संस्थानों के लिए एफएआर व ऊंचाई सीमा में राहत देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा चिन्हित इलाकों में हाईराइज और मिश्रित भू-उपयोग के जरिए बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा करने की योजना है।
प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, गृह मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित संशोधनों को हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत मास्टर प्लान में बदलाव की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
फ्रीहोल्ड से करोड़ों की संपत्तियां होंगी अन-लॉक
लीजहोल्ड व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने का प्रस्ताव भी बैठक में महत्वपूर्ण रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर में करोड़ों रुपये की संपत्तियां अनलाक होंगी। संपत्ति मालिकों को राहत मिलने के साथ प्रशासन का राजस्व भी बढ़ेगा और कारोबार करना आसान होगा। यूटी प्रशासन ने मई में इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर गृह मंत्रालय को भेजा था।
पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को मालिकाना हक की उम्मीद
पुनर्वास कालोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने का प्रस्ताव भी लंबे समय से लंबित है। प्रशासन ने इस संबंध में भी गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। इस पर फैसला होने से हजारों परिवारों की संपत्तियों से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मेयर का कार्यकाल ढाई साल करने पर भी नजर
मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने का प्रस्ताव भी बैठक में अहम रहेगा। नगर निगम के मौजूदा सदन का कार्यकाल समाप्त होने की ओर है और आने वाले महीनों में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में मेयर का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला निगम के कामकाज के साथ-साथ आगामी राजनीतिक बदलाव पर भी असर डाल सकता है।
मंजूरी मिली तो आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
प्रशासन की नजर अब दिल्ली में होने वाली बैठक के फैसले पर है। अधिकारियों का कहना है कि सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद संबंधित प्रस्तावों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में चंडीगढ़ के विकास और प्रशासन से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी सुझाव आने की संभावना है।
