पंजाब-चंडीगढ़ के 2 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, स्कूल में तैयार किए 3D थिएटर और वर्चुअल फिजिक्स लैब

चंडीगढ़
शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर के 48 चुनिंदा शिक्षकों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। इनमें पंजाब और चंडीगढ़ के दो शिक्षक भी शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई को किताबों से आगे निकला। 

चंडीगढ़ के रवि जयसवाल ने स्कूल में 3D गुंबद थिएटर और मौसम केंद्र बनाकर बच्चों को अंतरिक्ष और विज्ञान का सीधा अनुभव दिया।

वहीं, पटियाला के डॉ. दिनेश कुमार ने वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल तैयार कर छात्रों के मन से फिजिक्स का डर दूर किया। दोनों शिक्षकों की ये पहल अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है।

अब दोनों टीचरों के बारे में विस्तार से पढ़िए…
स्कूल में एक 3D गुंबद थिएटर बनाया रवि जयसवाल चंडीगढ़ के मलोया कॉलोनी के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल में साइंस टीचर हैं। उन्होंने विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों को बच्चों के लिए आसान और रोचक बनाने के लिए स्कूल में एक 3D गुंबद थिएटर बनाया है। इसके लिए उन्होंने स्कूल के हॉल में टिन और थर्मोकोल जैसी बेकार चीजों का इस्तेमाल किया। इस गुंबद पर छात्रों को अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़े वीडियो और तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इससे बच्चे विषयों को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय देखकर और समझकर सीखते हैं।

कपूरथला की साइंस सिटी से आया आइडिया जायसवाल ने बताया कि स्कूल के स्टूडेंट्स अकसर उनसे कपूरथला की साइंस सिटी घूमने की इच्छा जताते थे। इसी से उन्हें स्कूल में ही बच्चों को ऐसा अनुभव देने का विचार आया। उन्होंने सबसे पहले अपने स्कूल में गुंबद थिएटर तैयार कराया। बाद में उनके इस प्रयोग को चंडीगढ़ के छह अलग-अलग सरकारी स्कूलों में भी शुरू किया गया।

स्कूल के हॉल में टिन और थर्मोकोल की मदद से गुंबदनुमा ढांचा बनाया गया। इस पर अंतरिक्ष और दूसरे वैज्ञानिक विषयों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इससे स्टूडेंट्स विज्ञान के कठिन विषयों को भी आसानी से समझ पाते हैं।

20 छात्रों ने राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनियों में लिया हिस्सा जायसवाल ने मालोया स्कूल में स्टूडेंट्स के लिए एक मौसम केंद्र भी बनाया है। यहां बच्चे मौसम से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा वे वर्षामापी यंत्र की मदद से बारिश की मात्रा भी मापते हैं। इस तरह स्टूडेंट विज्ञान को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उसे अपने आसपास की चीजों से जोड़कर समझते हैं। जायसवाल के स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रदर्शनियों में भी हिस्सा लिया है। उनके अनुसार करीब 20 स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल का नाम रोशन किया है।

जरूरतमंद विद्यार्थियों की आर्थिक मदद भी करते हैं जायसवाल खुद चंडीगढ़ में पढ़ाई कर चुके हैं। जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपने स्टूडेंट्स को आर्थिक मदद भी दी है, ताकि पैसे की कमी के कारण उनकी पढ़ाई न रुके। उन्होंने बताया कि उनके दो पूर्व स्टूडेंट्स इस समय पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पीएचडी कर रहे हैं।

खुद की अधूरी पढ़ाई को छात्रों के सपनों से जोड़ते हैं जायसवाल ने बताया कि उनके पढ़ाने का तरीका उनके खुद के छात्र जीवन से भी जुड़ा है। उनका मानना है कि पढ़ाई के दौरान जो अवसर उन्हें नहीं मिल सके, वे अवसर आज के स्टूडेंट्स को उपलब्ध होने चाहिए।

सहकर्मी से मिली पुरस्कार की जानकारी जायसवाल ने बताया कि उन्हें अपने चयन की जानकारी एक सहकर्मी से मिली। उनके सहकर्मी ने शुक्रवार को पुरस्कार के लिए चुने गए शिक्षकों की सूची देखी थी। इसके बाद जायसवाल को ईमेल मिला, जिसमें उनके चयन की पुष्टि की गई। आधिकारिक सूची में उनका नाम चंडीगढ़ के मालोया कॉलोनी स्थित गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के शिक्षक के रूप में शामिल है।

पंजाब से अकेले शिक्षक, राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित पटियाला के सरकारी विक्टोरिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल के फिजिक्स लेक्चरर डॉ. दिनेश कुमार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। वे पूरे पंजाब से इस सम्मान के लिए चयनित होने वाले एकमात्र शिक्षक हैं। करीब 25 वर्षों से शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय डॉ. कुमार पिछले 10 से अधिक वर्षों से इसी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं।

वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा मॉडल डॉ. दिनेश कुमार ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की मदद से वर्चुअल फिजिक्स लैब तैयार की है। इसके जरिए छात्र बिना महंगे लैब उपकरणों के डिजिटल माध्यम से फिजिक्स के प्रयोगों को समझ सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने रोजमर्रा की बेकार और कम लागत वाली वस्तुओं से 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए किया जाता है।

सरकारी स्कूलों की छात्राओं को सीधा फायदा वर्चुअल लैब का सबसे बड़ा फायदा उन सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को होता है, जहां पर्याप्त प्रयोगशाला उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। इंटरैक्टिव विजुअल्स और डिजिटल प्रयोगों के जरिए छात्र फिजिक्स की अवधारणाओं को आसानी से समझ पाते हैं। डॉ. कुमार का प्रयास है कि स्टूडेंट्स के मन से फिजिक्स का डर दूर हो और वे इसे प्रयोग करके सीखें।

पीएचडी की, 2020 में मिला स्टेट अवॉर्ड 52 वर्षीय डॉ. दिनेश कुमार ने फिजिक्स में पीएचडी की है। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पटियाला के सरकारी मोहिंद्रा कॉलेज और एमएससी पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से की। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 2020 में पंजाब सरकार के स्टेट टीचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. कुमार स्कूल समय के बाद और छुट्टियों में जरूरतमंद छात्राओं को मुफ्त अतिरिक्त कक्षाएं और मार्गदर्शन देते हैं।

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