कोरोना के खौफ पर ताजमहल की दीवानगी भारी पड़ गई। शनिवार को ताज के दीवानों का सैलाब इसकी एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ा। कोरोना संक्रमण के कारण 17 मार्च को बंद हुए ताजमहल में 10 महीने के बाद सबसे ज्यादा भीड़ रही। शनिवार को ताजमहल पर 25 हजार से ज्यादा सैलानियों ने प्रवेश किया। इनमें ऑनलाइन 15 हजार टिकट बिके तो पूर्वी और पश्चिमी गेट टिकट खिड़की से 5190 टिकटों की बिक्री की गईं। 15 साल से कम उम्र के 4 हजार से ज्यादा बच्चे भी अपने अभिभावकों के साथ आए, जिनका टिकट नहीं लगता।

12:30 बजे ही खोल दी गई टिकट खिड़की
शनिवार से ताजमहल पर खिड़की से टिकटों की बिक्री शुरू कर दी गई। डीएम के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने ऑफलाइन टिकटें तब बेचने का निर्णय लिया था, जब ऑनलाइन टिकटें पूरी खत्म हो जाएंगी, लेकिन दोपहर 12:30 बजे टिकट बुक कराने में सर्वर और नेटवर्क की समस्या बढ़ी तो एएसआई अधिकारियों ने टिकट खिड़कियों को चालू करा दिया। तब तक 900 टिकट वेबसाइट पर नजर आ रहे थे। एक बजे वह भी खत्म हो गए। इसके बाद दोनों गेटों के टिकट काउंटरों से एएसआई ने 5190 टिकट बेचे।
छह गुना सैलानी आए तो ध्वस्त हुए कोविड के नियम
ताजमहल पर बीते माह तक 5 हजार टिकटों की बिक्री के आदेश थे। तब हर दिन 3500 से चार हजार के बीच ही सैलानी आ रहे थे। कैपिंग बढ़ाकर 10 हजार करने पर भी 8 हजार तक ही पर्यटक आए, लेकिन पिछले सप्ताह कैपिंग बढ़ाकर 15 हजार की गई और नए साल में टिकट खिड़की से टिकट बेचने के आदेश हुए तो भीड़ का रिकॉर्ड टूट गया।
नए साल के पहले दिन शुक्रवार बंदी के कारण लोग ताज नहीं देख पाए थे, ऐसे में शनिवार को 10 महीने बाद सर्वाधिक 25 हजार से ज्यादा सैलानियों ने ताज देखा। आम दिनों के मुकाबले 6 गुना ज्यादा सैलानी होने से कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो पाया। पूर्वी और पश्चिमी गेट पर सुरक्षा जांच के लिए लंबी कतारें शाम तक लगी रहीं।
अब शायद हमारे अच्छे दिन आ जाएं
एक साल बाद ताज पर इतने पर्यटक आए तो लगा कि कोरोना का डर खत्म हो गया। अब शायद हमारे अच्छे दिन आ जाएं। एक साल से सन्नाटा था, लेकिन ताज पर शनिवार की भीड़ से उम्मीदें बढ़ी हैं कि लोग और बढ़ेंगे।
