पटना
काॅरपोरेट की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में पैरेंट्स ऑफ द मंथ, टीचर्स ऑफ द मंथ और स्टुडेंट ऑफ मंथ की व्यवस्था शुरू होने जा रही है।
कॉरपोरेट संस्थानों में इंप्लाई ऑफ द मंथ की व्यवस्था चलती है। सरकारी विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तर्ज पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) का आरंभ हुआ है।
इस व्यवस्था के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि पीटीएम के दिन अभिभावक अपने बच्चों के परफार्मेंस को जानने हर हाल में विद्यालय में आएं।
रचनात्मक सुझाव दिए और सक्रियता दिखाई तो बनेंगे पैरेंट्स ऑफ द मंथ
बच्चे के शिक्षकों से बात करें। इस क्रम में यह व्यवस्था की जा रही कि अभिभावक यह बताएं कि विद्यालय की व्यवस्था को और अधिक उत्कृष्ट करने को ले और क्या-क्या किया जा सकता है।
अभिभावकों के रचनात्मक सुझाव को संबंधित शिक्षकों द्वारा नोट किया जाएगा। सभी सुझावों का अध्ययन संबंधित विद्यालय के शिक्षकों के समूह द्वारा किया जाएगा
सर्वश्रेष्ठ सुझाव देने वाले को पैरेंट्स ऑफ द मंथ का खिताब मिलेगा। विद्यालय में उन्हें सम्मानित किए जाने की व्यवस्था भी बन रही।
इस तरह तय होंगे टीचर्स ऑफ द मंथ
शिक्षा विभाग ने अभी सभी माडल स्कूलाें के लिए टीचर्स ऑफ द मंथ की व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विद्यालय को एक फार्म दिया जाएगा।
फार्म को सभी शिक्षक भर कर देंगे। उस क्रम में यह देखा जाएगा कि संबंधित शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई में कोई नवाचार किया या नहीं।
पढ़ाई सिलेबस के लिहाज से जहां पहुंचनी थी वहां पहुंची या नहीं। इस क्रम में विद्यालय प्रबंधन विद्यार्थियों की भी राय लेगा।
स्टुडेंट्स ऑफ द मंथ के लिए हाजिरी भी महत्वपूर्ण
स्टुडेंट्स ऑफ द मंथ को तय किए जाने को ले कई तरह के मानक तय किए गए हैं। इसमें एक मानक यह भी है कि विद्यार्थी की स्कूल में हाजिरी कितनी रही।
इसके अलावा गृह कार्य, क्लास में एकाग्रता, स्कूल की अन्य तरह की गतिविधियों में उसकी सक्रियता आदि का आकलन किया जाएगा। इसके लिए भी विद्यालय में एक फार्म उपलब्ध रहेगा जिसे शिक्षकों को भरना।
विद्यालय में अभिभावक रूचि लें, शिक्षकों के बीच कुछ नया करने का भाव जगे तथा विद्यार्थियों की सक्रियता नजर आए इसे केंद्र में रखकर इन सभी को सम्मानित करने की योजना शुरू की जा रही। इसका सकारात्मक असर दिखेगा।
मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री
