चंडीगढ़ में देशभर के मेयरों ने सीखा शहर चलाने का तरीका, सुबह 5 बजे फील्ड में निकलने की दी सलाह

चंडीगढ़.

मेयर का काम सिर्फ कार्यालय में बैठकर अधिकारियों से रिपोर्ट लेना नहीं है। उन्हें सुबह पांच, छह या सात बजे उठकर बिना किसी अधिकारी को साथ लिए शहर की गलियों, बाजारों और पार्कों में जाना चाहिए।

वहां देखना चाहिए कि सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं या नहीं, सड़क और नालियों की स्थिति क्या है और जनता को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जनता के बीच जितना घूमेंगे, उतना ही काम मिलेगा। यह सलाह यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने 118वें अखिल भारतीय मेयर्स काउंसिल सम्मेलन में देशभर से आए महापौरों को दी।

कटारिया ने कहा कि जनप्रतिनिधि को जनता से सीधे जुड़ना होगा। जनसुनवाई को औपचारिकता बनाने के बजाय अधिक से अधिक लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए। किसी बड़े व्यक्ति के आने पर चाय-पानी कराने में समय लगाने से बेहतर है कि आम आदमी को दो मिनट सुना जाए और उसकी समस्या के समाधान का रास्ता निकाला जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *