राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। करीब 10 महीने बाद यह पहला पर्व है जिस पर कोरोना का असर नहीं दिख रहा है। लेकिन, उत्साह और उल्लास के इस पर्व के बीच कुछ हादसे की खबरें भी आ रही हैं। कोटा में पतंग लूटते समय एक बालक की से माैत हो गई है। पतंग लूटते समय वह बालक ट्रेन के इंजन से टकरा गया। सीकर में मांझे से 13 लोग गंभीर घायल हो चुके हैं। यह सभी सरकारी अस्पताल पहुंचे हैं। वहीं, जयपुर में अब तक 4 लोगों के चेहरे मांझे से कटने की खबर है। कई और शहरों से मांझे से लोगों के घायल होने की सूचनाएं भी हैं। राजधानी जयपुर, सीकर, कोटा समेत कई शहरों में परिंदे भी मांझे में उलझकर जमीन पर गिरे मिले हैं।
सुबह मौसम बदला, दोपहर में तल्ख धूप
मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही सूर्य थोड़ा तल्ख हो गया है। मकर संक्रांति पर प्रदेश का मौसम कुछ अलग हटकर दिखाई दे रहा है। संक्रमण काल की शुभ मकर संक्रांति पर जयपुर समेत तमाम शहरों में पतंगें आकाशीय हो गई हैं। दान-पुण्य के लिए पांव मंदिरों, आश्रमों की बढ़े हैं। पतंगबाजी के बीच दुपहिया वाहन चालकों और आकाश में उड़ते परिंदों की परीक्षा भी चल रही है।
इससे पहले जयपुर सहित प्रदेश के हर शहर में लोग छतों पर पहुंच गए। तब से ही छतों पर पतंग हैं, चरखे हैं, पेच लड़ने-लड़ाने की बातें हैं और ये काटा-वो काटा की पुकार है। रजवाड़ों से चली आ रही परंपरा की डोर जितनी ऊंचाई तक पहुंच रही है, हर मन की खुशियां उतनी ही ऊंचाइयां ले उठी हैं।
मकर संक्रान्ति का यह अवसर दिल खोलकर त्योहार मनाने का अवसर है। जयपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, जोधपुर समेत तमाम छोटे-बड़े शहरों का नजारा कहीं कम तो कहीं ज्यादा का भले ही हो, उत्साह किसी से कम नहीं है। अलवर में पतंगबाजी नहीं है, लेकिन अपनी परंपरा के अनुसार बच्चों से लेकर बड़े तक मैदानों में, छतों पर, घर की चार दीवारी में गेंद लेकर सतोलिया, राउंडल और क्रिकेट का लुत्फ उठा रहे हैं।
