नई दिल्ली: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आगामी एक फरवरी को बजट पेश करने वाली है। ऐसे में हर क्षेत्र से जुड़े लोगो की उम्मीद इस बजट से जुड़ी हुई है। क्योंकि कोरोना संकट की वजह से हर सेक्टर प्रभावित हुआ है, भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी के दौर में चली गई है। कारोबार की स्थिति समान्य हो रही है पर पूर्ण रुप से पटरी पर आने में बहुत समय लगेगा। लेकिन मौजूदा कयास इस बजट से लगाया जा रहा है, जिससे छोटे बड़े सभी उद्योगों को राहत मिल सके। हर क्षेत्र के लोग अपने लिए आस लगाए बैठे है, इस स्थिति में महिलाओं को भी इस बजट से काफी उम्मीदें है। महिलाओं से जुड़ें कई ऐसे मुद्दे हैं जिसको लेकर इस बजट से उम्मीद की जा रही है।
आज के नये दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम कर रही है। तो घर में काम करने वाली महिलाओं से लेकर ऑफिस में काम करने वाली महिलाओं को बजट से काफी उम्मीदें है। इसके अलवा महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण के साथ ही महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर इस बजट में क्या है ये देखने वाली बात होगी। क्योंकि पूरे देश में महिलाओं के लिए कई सारी योजनाएं चलाई जा रही है।
लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना काल के बाद बजट में कुछ बदलाव देखने को मिल सकती है। इसी सन्दर्भ में यूएन वीमेन के लिए भारत में उप प्रतिनिधि के तौर पर कार्य कर रही निष्ठा सत्यम ने भी आगामी बजट को लेकर अपनी राय दी है। निष्ठा सत्यम का कहना है, “कोरोना संकट की वजह से पूरे विश्व के अर्थव्यवस्था को मंदी का सामना करना पड़ा है। इसलिए भारत के बेहतर आर्थिक विकास के लिए बजट को महिलाओं के विकास से जोड़कर रखना होगा। फैमिली प्लैनिंग, स्वस्थ मां, गर्भावस्था और बच्चे की डिलीवरी के बाद पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने और महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है जिससे कि देश की आबादी में एक पॉजिटिव साइकिल बन सके।”
आगे सत्यम यह भी बताती है कि महिलाओं को वर्क फोर्स में शामिल करने के प्रयास हो। इसकी वजह से देश के आर्थिक विकास में तेजी आ सकती है। इससे देश के विकास संबंधी लक्ष्य को प्राप्त करने में भरपूर सहयोग मिलेगी। साथ ही, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत देश के आधी आबादी को और भी सशक्त करने के लिए उनकी मजदूरी में इजाफा होना चाहिए।
कोरोना काल में डॉक्टर्स की एक अहम भूमिका रही है। ऐसे में बजट को लेकर स्वास्थ्य संबंधी क्षेत्रों के लिए भी काफी उम्मीदें की जा रही है। मेडस्केप इण्डिया की चेयरपर्सन डॉक्टर सुनीता दुबे ने भी अपनी राय प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र के जरिये पहुंचा चुकी है। डॉक्टर सुनीता ने अपने पत्र में सभी मेडिकल स्टाफ के लिए 5 साल का हेल्थ इंश्योरेंस की बात कही है। सरकार की ओर से गायनेकोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिक फिजिशियन को विशेष ट्रेनिंग के लिए स्कॉलरशिप फंड की सुविधा होना चाहिए। साथ ही, वैसे डॉक्टर्स को टैक्स में छूट होनी चाहिए जो ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य क्षेत्रों को दुरस्त करने में सरकार के साथ अपनी सक्रीय सहभागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हो, उन्होंने आगामी बजट को लेकर अपनी राय रखी
