लॉकडाउन का काला सच:बेरोजगार पिता के फांसी लगाने के 3 दिन बाद तक भूख से बिलखते रहे बच्चे, 15 दिन भूख से छटपटाता रहा परिवार

उत्तर प्रदेश के बरेली और अलीगढ़ से चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। दोनों मामलों का कनेक्शन लॉकडाउन, रोजगार और भूख से है। बरेली में घर में बंद बच्चों ने पड़ोसियों से खाना मांगा। पड़ोसी आए तो देखा कि बच्चों का पिता फंदे से लटका है। इसी तरह अलीगढ़ में एक ऐसे परिवार को NGO ने रेस्क्यू किया है, जो 15 दिन से भूख से तड़प रहा था। लॉकडाउन का काला सच सामने लाने वाली ये 2 कहानियां…

पहली कहानी: पिता की लाश के साथ 3 दिन घर में बंद रहे मासूम
बरेली के गायत्री नगर में रहने वाला मनोज दयाल (35) नोएडा में काम करता था। लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो वो वापस बरेली आ गया। कुछ दिन पहले ही उसकी पत्नी लड़ाई करके मायके चली गई थी। 4 और 6 साल के बच्चों को पति के पास छोड़ दिया था। इसके बाद मनोज ने फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली। बात तब सामने आई, जब उसके बच्चों ने पड़ोसियों से खाना मांगा।

रोते हुए बच्चे पड़ोसियों से खाना मांग रहे थे, लोगों ने पूछा कि कोई घर पर नहीं है क्या? तो बच्चों ने बताया कि मम्मी नहीं है, पापा कुंडे से लटक रहे हैं। हमें बहुत भूख लगी है। पड़ोसियों ने खिड़की से झांका तो मनोज का शव फंदे से लटका हुआ था।

दूसरी कहानी: भूख के चलते बोल भी नहीं पा रहे थे, मदद मिली तो रोने लगे
अलीगढ़ के नगला मंदिर इलाके से NGO हैंड फॉर हेल्थ ने एक परिवार के 6 लोगों को रेस्क्यू किया है। ये 15 दिन से भूख से तड़प रहे थे। संस्था को घर पर एक महिला और 5 बच्चे छटपटाते हुए मिले। महिला का नाम गुड्डी देवी है। उसके पति बिजेंद्र कुमार की कुछ साल पहले मौत हो गई थी।

वह मजदूरी करके अपने 5 बच्चों की देखभाल कर रही थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते उसका रोजगार छिन गया। किसी तरह कुछ दिनों तक महिला ने घर का खर्च चलाया। फिर जब पैसे खत्म हो गए तो आस-पास के लोगों से मांगकर कुछ दिन तक बच्चों का पेट भरा, लेकिन बाद में आसपास के लोगों ने भी मदद देने से इनकार कर दिया। इसके बाद घर के लोगों ने कुछ नहीं खाया।

इन लोगों में इतनी भी ताकत नहीं बची थी कि कुछ बोल सकें। संगठन के लोगों को देखते ही सभी रोने लगे। तुरंत पुलिस और प्रशासन की मदद से सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उधर, डीएम ने नगला मंदिर के ग्राम प्रधान और राशन डीलर के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

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