रायपुर। नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्षों के अप्रत्यक्ष चुनाव को भाजपा ने कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। इस कारण राज्य सरकार कोर्ट में कैविएट लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार को इस बात की चिंता है कि कहीं, भाजपा गुपचुप तरीके से अप्रत्यक्ष चुनाव के खिलाफ याचिका न लगा दे, जिससे सरकार का फैसला प्रभावित हो।
महापौर और अध्यक्षों का चुनाव जनता न करे। जनता केवल पार्षदों को चुनें। जिस दल के पार्षद ज्यादा होंगे, वे अपने बीच से महापौर या अध्यक्ष का चुनाव करें। राज्य सरकार इस व्यवस्था को लागू करने जा रही है। मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने इस अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को लागू करने की अनुशंसा कर दी है।
उपसमिति की रिपोर्ट कैबिनेट में जाएगी। कैबिनेट अपनी मुहर लगाकर उसके राज्यपाल को भेजेगा, ताकि अध्यादेश लागू करने की मंजूरी मिल सके। भाजपा अप्रत्यक्ष चुनाव के विरोध में उतर चुकी है। हर स्तर पर सरकार को चुनौती देने की चेतावनी दी है। इस कारण सरकार ने हाई कोर्ट में कैविएट लगाने का विचार किया है, ताकि सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका लगे, तो उसकी सूचना मिल जाए।
कैविएट का मतलब
कैविएट का मतलब होता है, ऐसी याचिका जिसमें याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बिना अदालत अपना फैसला नहीं दे सकती है। कैविएट उच्चतम और उच्च न्यायालय में दाखिल किया जाता है। सरकार उस परिस्थिति में कैविएट लगाती है, जब उसे ऐसा पूर्वानुमान हो कि कोई पक्ष उसके फैसले या नियम को चुनौती दे सकता या फिर उसे अदालत से खारिज करवा सकता है।
