Ayodhya Case Judgement 2019 : अयोध्या मामले और करतारपुर कॉरिडोर से जुड़ा है गुरू, केतु और शनि का ये संबंध

 कई वर्षों से लंबित अयोध्या मामले में फैसला और करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन नौ नंबवर 2019 को हो गया। ये दोनों घटनाएं सामान्य नहीं हैं। अयोध्या मामले में जिस तरह से फैसला आने के बाद सभी लोगों ने इसका खुले दिल से स्वागत किया है और शांति बनी हुई है वह अपने आप में मिसाल है। इससे पहले इस मामले में कई बार खूनी संघर्ष हो चुका है। वहीं, चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ भी धार्मिक मामले पर भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है। आज ही के दिन पाकिस्तान ने करतारपुर गुरुद्वारे तक सिख तीर्थ यात्रियों के जाने के लिए पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर को खोल दिया है। यहां गुरु नानकदेव ने अपने जीवन के आखिरी 18 साल बिताए थे।

धर्म के मामले में यह दोनों ही घटनाएं ऐसे समय में हुई हैं, जब गुरु अपनी ही मूल त्रिकोण राशि धनु में आ गए हैं, जिसमें न्याय के देवता शनि ग्रह और आध्यात्म के कारक केतु पहले से ही मौजूद हैं। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एस्ट्रोलॉजर्स सोसाइटी (AIFAS) के कानपुर चैप्टर के चेयरमैन और इसी संस्था के यूपी के गवर्नर पंडित शरद त्रिपाठी ने इस बारे में ग्रहों को गोचर और उसके नतीजों के बारे में कई जानकारियां दीं।

उन्होंने बताया कि अपनी मूल त्रिकोण राशि धनु में देव गुरु ने पांच नवंबर प्रवेश किया है। वह सकारात्मकता और समृद्धि के कारक हैं और काल पुरुष की कुंडली में नौंवा भाव धर्म, आध्यात्म और भाग्य का होता है। लिहाजा, अपनी मूल त्रिकोण राशि में देव गुरु के आने से शांति और समृद्धि देश-दुनिया में बढ़ेगी। लोगों का धर्म-आध्यात्म के प्रति विश्वास बढ़ेगा फिर वे चाहें किसी भी धर्म या पंथ को मानने वाले हों। जहां तक बात अयोध्या मामले में कड़े फैसले के आने की और चिर शत्रु देश पाकिस्तान के साथ धार्मिक मामले में आगे बढ़ने की है, तो इसमें शनि और केतु की मौजूदगी भी जरूरी थी।

पंडित शरद त्रिपाठी ने बताया कि ऐसा नहीं है कि गुरु ने धनु राशि में इससे पहले कभी गोचर नहीं किया हो, या शनि का साथ उसे पहले नहीं मिला हो। इस बार जब गुरु ने धनु में गोचर किया, तो उसे तीन महीनों के लिए न्याय के देवता शनि का साथ मिला और धर्म वह अध्यात्म के कारक केतु की भी युति मिली। धनु राशि कठोर निर्णय के लिए जानी जाती है। लिहाजा, इस बार कोर्ट ने कठोर निर्णय दे दिया और सबकुछ शांति-पूर्ण तरीके से निपट गया।

लिहाजा, ऐसे समय में हिंदुओं की धार्मिक भावना संतुष्ट हुई और न्याय के देवता शनि के वहां मौजूद होने की वजह से धर्म की स्थापना हुई है। राम लला को विवादित जमीन पर मालिकाना हक मिल गया है। वहीं, मुस्लिम पक्ष की बात करें, तो उसके साथ भी न्याय हुआ है और उसे मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि भी मुहैया कराई जा रही है। उधर, देश के आजाद होने के बाद कई वर्षों से दूरबीन से ननकाना साहिब गुरुद्वारे के दर्शन करने वाले सिख तीर्थयात्रियों को वहां 9 नवंबर को पहुंचाना संभव हो सका।

पंडित शरद त्रिपाठी ने बताया कि आजाद भारत की कुंडली वृष लग्न की है। इसमें धनु राशि आठवें भाव में पड़ती है, जहां ये तीनों ग्रह गोचर कर रहे हैं। शनि इस राशि में 26 जनवरी 2020 तक मौजूद रहेंगे और इसके बाद मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। लिहाजा इन दो महीनों से अधिक समय में इस तरह के फैसले जो लंबे समय से लंबित थे, जिनके फैसले नहीं आ रहे थे, वे आ सकते हैं। आठवां भाव दबी हुई इच्छाओं और लंबित चीजों का भी होता है, इसलिए इस समय में धर्म से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं देखने को मिलेंगी, जो लंबित थी और जिनको दबा दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *