जशपुरनगर गुरुवार को शहर से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर एक छोटे से कस्बे में दो बेटियों ने ऐसा कुछ कर दिखाया कि जिसने भी इसे देखा और सुना बेटियों के साहस की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सका। यहां दो बेटियों ने अपने मृत पिता को अपने कंधे पर रख कर ना केवल श्मशान पहुंचाया अपितु उन्हें मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई भी दी। झारखंड की सीमा पर स्थित लोदाम निवासी चंद्रशेखर मंझोनिया (80) का मंगलवार को ह्दयाघात से निधन हो गया था।
घटना उस वक्त हुई जब बुजुर्ग अपने निजी काम से शहर के बीएस मार्केट स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में आया हुआ था । यहां वे बैंक कर्मचारियों से चर्चा कर ही रहे थे कि अचानक बेहोश हो कर गिर पड़े। उन्हें मोैके पर मौजूद कर्मचारियों व अधिकारियों ने जिला चिकित्सालय पहुंचाया। जांच के बाद चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक चंद्रशेखर मंझोनिया लोदाम के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय लोदाम से बतौर प्रधानपाठक सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पत्नी कैलाशवती मंझोनिया का 1997 में ही निधन हो गया था।
वे लोदाम में किराए के एक मकान में दो बेटी श्रद्वा मंझोनिया और भानो मंझोनिया के साथ रहा करते थे। हादसे के वक्त घर में छोटी बेटी भानो मंझोनिया ही थी। इस दौरान श्रद्वा पारिवारिक काम के सिलसिले में बिलासपुर गई हुई थी। सूचना मिलने पर आनन फानन में श्रद्वा बिलासपुर से बुधवार की शाम लोदाम पहुंची। लेकिन इस वक्त तक सूर्यास्त हो जाने की वजह से अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका।
गुरुवार की सुबह अपने पिता को अंतिम विदाई देने के लिए श्रद्वा और भानो ने पिता से बिछड़ने के गम से उबरते हुए स्वयं ही बेटा का फर्ज निभाते हुए पूरे सामाजिक रस्मो रिवाज अदा कर अंतिम विदाई देने का निर्णय लिया। इस दौरान श्रद्वा ने स्वयं पिता को अंतिम विदाई देने की रस्म अदा करने की इच्छा जाहिर की। परिजनों ने श्रद्वा और भानो की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस पर अपनी सहमति दी।
सुबह तकरीन 7 बजे शुरू हुआ स्व. चंद्रशेखर की अंतिम यात्रा। घर से बाहर निकालते हुए बड़ी बेटी श्रद्वा ने पिता के अर्थी को कंधा दिया। श्रद्वा यहीं पर नहीं रूकी पिता के अंतिम यात्रा में पग-पग साथ निभाने के बाद उन्हें श्मशान तक पहुंचाया। यहां चिता पर लिटाने के बाद,वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुखाग्नि दिए जाने से पहले किए जाने वाले तमाम रस्में को एक बेटे की तरह पूरी मजबूती व साहस के साथ निभाया और अंत में मुखाग्नि देकर पिता के नश्वर शरीर को दुनिया से विदाई दी।
